अनूपपुर: बैसाखी पूर्णिमा पर नर्मदा में श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाकर मंदिर में किया पूजन
अनूपपुर, 01 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में प्रसिद्ध तीर्थ एवं पर्यटक नगरी मां नर्मदा की उद्गम स्थल अमरकंटक में शुक्रवार को बैसाखी पूर्णिमा के मौके पर हजारों भक्तों ने नर्मदा नदी में डुबकी लगाई। इसी के साथ एक महीने से चल रहा बैसाखी स्नान का मेला भी खत्म हो गया। लोगों ने कोटि तीर्थ घाट, रामघाट और संगम तट जैसे अलग-अलग घाटों पर नहाकर पुण्य कमाया।
मां नर्मदा की उद्गम के तट पर सुबह 5 बजे से भीड़ जुटने लगी थी, जो शाम तक जारी हैं। स्नान के बाद भक्तों ने मां नर्मदा के मंदिर जाकर दर्शन किए और पूजा-पाठ किया। इस दौरान लोगों ने अपनी श्रद्धा के अनुसार गरीबों को खाना, कपड़े और फल भी बांटे। पूरे मंदिर परिसर में मां नर्मदा के जयकारे गूंजते रहे।
मौसम ने दी गर्मी से राहत
गुरुवार रात को हुई तेज आंधी और बारिश ने मौसम का मिजाज बदल दिया। इससे तापमान में गिरावट आई और श्रद्धालुओं को तपती गर्मी से बड़ी राहत मिली। सुहावने मौसम की वजह से भक्तों में दर्शन और स्नान को लेकर काफी उत्साह देखा गया। वहीं इस बार व्यापारियों के चेहरे थोड़े मायूस नजर आए। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि पिछले सालों के मुकाबले इस बार गर्मी बहुत ज्यादा थी, जिसकी वजह से तीर्थयात्री और पर्यटक कम संख्या में अमरकंटक पहुंचे। यात्रियों की कमी का सीधा असर यहां के व्यापार पर पड़ा है।
मृत्युंजय आश्रम में श्रीमद् भागवत कथा का समापन,भंडार
वैशाख पूर्णिमा के शुभ अवसर पर धर्म, भक्ति और सेवा का अनुपम संगम देखने को मिला। इस पावन दिन मृत्युंजय आश्रम अमरकंटक में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण कथा का विधिवत समापन विशाल भोजन भंडारे के साथ संपन्न हुआ। इस पूरे आयोजन की व्यवस्थाएं आश्रम के व्यवस्थापक पंडित योगेश दुबे द्वारा सुव्यवस्थित रूप से संभाली गईं, जिसके चलते कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। वैशाख पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित इस धार्मिक आयोजन ने अमरकंटक की आध्यात्मिक गरिमा को और अधिक प्रखर करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, सेवा और भक्ति से जोड़ने का कार्य किया।
श्री कल्याण सेवा आश्रम में ध्वजा साहब का भव्य पूजन, परंपरा अनुसार बदली गई धर्म ध्वजा
पावन एवं आध्यात्मिक चेतना से ओत-प्रोत नगरी अमरकंटक स्थित श्री कल्याण सेवा आश्रम में वैशाख पूर्णिमा के शुभ अवसर पर धर्म ध्वजा की विशेष पूजन एवं अभिषेक और वैदिक विधि-विधान के साथ सम्पन्न हुआ। प्रातःकाल से ही आश्रम परिसर में भक्ति का दिव्य वातावरण व्याप्त हो गया था। प्रातः 9:00 बजे संत-महात्माओं एवं विद्वान आचार्यों के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य ध्वजा वंदना का पूजन-अभिषेक प्रारंभ हुआ।
उल्लेखनीय है कि उदासीन संप्रदाय की इस प्रमुख तपस्थली श्री कल्याण सेवा आश्रम में धर्म ध्वजा पूजन की यह प्राचीन परंपरा वर्ष में दो बार विधिपूर्वक संपन्न की जाती है। प्रथम शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर तथा द्वितीय वैशाख पूर्णिमा के दिन। इस विशिष्ट अनुष्ठान में पूजन-अभिषेक के उपरांत पुरानी धर्म ध्वजा को श्रद्धापूर्वक उतारकर नवीन वस्त्र एवं नई ध्वजा स्थापित की जाती है, जो नवचेतना, आस्था एवं आध्यात्मिक ऊर्जा के संचार का प्रतीक मानी जाती है।
आश्रम के प्रबंध न्यासी स्वामी हिमाद्री मुनि महाराज ने इस अवसर पर कहा कि उदासीन संप्रदाय में ध्वजा पूजन का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं, अपितु सनातन परंपराओं के संरक्षण, संवर्धन और सतत प्रवाह का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि ध्वजा परिवर्तन की यह परंपरा आश्रम की आध्यात्मिक गरिमा को अक्षुण्ण बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
इस भव्य एवं गरिमामयी आयोजन में स्वामी हरस्वरूप जी महाराज, स्वामी शांतानंद जी महाराज, स्वामी धर्मानंद जी महाराज, स्वामी नर्मदानंद जी महाराज, स्वामी रामानंद जी महाराज स्वामी धुनि दास जी महाराज, स्वामी रामानंद जी महाराज तथा स्वामी अमित दादा सहित अनेक संत-महात्मा अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाते रहे। वहीं पुजारीगण के विद्वान आचार्य पंडित मुकेश पाठक सहित पंडित संदीप जोशी एवं पंडित सुनील दुबे ने विधि-विधानपूर्वक सम्पूर्ण पूजन संपन्न कराया।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला