मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय से तत्कालीन सागर कलेक्टर संदीप जीआर और राजस्व सचिव विवेक पोरवाल के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट

 


सागर, 13 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश उच्‍च न्‍यायालय ने सागर कलेक्टर कार्यालय के एक कर्मचारी के नियमितीकरण से जुड़े मामले में अपने आदेश के पालन में देरी और कथित लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस विवेक जैन की एकल पीठ ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए तत्कालीन प्रमुख सचिव (राजस्व) विवेक पोरवाल और तत्कालीन सागर कलेक्टर संदीप जीआर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। अदालत ने दोनों वरिष्ठ अधिकारियों को 21 सितंबर 2026 को न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

नियमितीकरण के मामले से जुड़ा है विवाद

मामला सागर कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ सेक्शन ऑफिसर शीला सेन के नियमितीकरण से संबंधित है। कलेक्ट्रेट से प्राप्त जानकारी के अनुसार, हाईकोर्ट ने 19 मार्च को याचिकाकर्ता के दावे पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और सागर कलेक्टर को 90 दिनों के भीतर मामले पर विचार कर निर्णय लेने का आदेश दिया था। निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी जब आदेश के अनुरूप कोई प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हुई, तो शीला सेन ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की।

नोटिस के बावजूद पेश नहीं हुई अनुपालन रिपोर्ट

अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि संबंधित दोनों अधिकारियों को नोटिस की तामील हो चुकी थी। इसके बावजूद न तो हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट पेश की गई और न ही उनकी ओर से पैरवी के लिए किसी अधिवक्ता की नियुक्ति की गई। सागर कलेक्टर कार्यालय की ओर से केवल एक संपर्क अधिकारी नियुक्त किए जाने की जानकारी अदालत को दी गई। हाईकोर्ट ने इसे आदेश के अनुपालन के लिए पर्याप्त नहीं माना।

21 सितंबर को कोर्ट में पेश होने का आदेश

अदालत ने मामले में प्रशासनिक शिथिलता पर नाराजगी जताते हुए तत्कालीन प्रमुख सचिव (राजस्व) विवेक पोरवाल और तत्कालीन सागर कलेक्टर संदीप जीआर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया। दोनों अधिकारियों को 21 सितंबर 2026 को हाईकोर्ट के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। मामले में अदालत के इस सख्त रुख के बाद अब संबंधित अधिकारियों की अगली सुनवाई में व्यक्तिगत उपस्थिति और पूर्व आदेश के अनुपालन को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुमार चौबे