अयोध्या बायपास पर हजारों पेड़ों की कटाई के विरोध में फूटा जनाक्रोश, पर्यावरण प्रेमियों ने किया प्रदर्शन
भोपाल, 28 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के अयोध्या बायपास पर 10 लेन सड़क निर्माण परियोजना के तहत हजारों हरे-भरे पेड़ों की कटाई के विरोध में गुरुवार को पर्यावरण प्रेमियों, समाजसेवियों और स्थानीय नागरिकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रदेश सरकार, नगर निगम और एनएचएआई के खिलाफ आक्रोश जताते हुए “वृक्ष हत्या बंद करो”, “हरियाली बचाओ-भोपाल बचाओ” और “पेड़ बचेंगे तो जीवन बचेगा” जैसे नारे लगाए।
प्रदर्शन के दौरान कटे हुए वृक्षों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। लोगों ने फूल चढ़ाकर, अगरबत्ती जलाकर और दो मिनट का मौन रखकर उन पेड़ों को याद किया, जिन्हें वे “शहर के फेफड़े” बता रहे थे। इस आंदोलन में पर्यावरण प्रेमी उमा शंकर तिवारी, कांग्रेस नेता प्रदीप मोनू सक्सेना, दीपक गुप्ता, अभिनव मुकेश यादव, एकजोट सिंह, मुकेश सिंह सहित बड़ी संख्या में पर्यावरणविद्, समाजसेवी और आम नागरिक उपस्थित रहे।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि विकास के नाम पर पर्यावरण की निर्मम हत्या की जा रही है। अयोध्या बायपास चौड़ीकरण परियोजना के तहत जिन हजारों पेड़ों को काटा जा रहा है, वे केवल लकड़ी नहीं, बल्कि भोपाल की हरियाली, स्वच्छ हवा और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य थे। पर्यावरणविद् उमा शंकर तिवारी और प्रदीप मोनू सक्सेना ने कहा कि “पेड़ों की हत्या पूरे शहर की हत्या है। 40 से 100 साल पुराने वृक्षों को काटकर भोपाल की प्राकृतिक पहचान मिटाई जा रही है। हम यह लड़ाई तब तक जारी रखेंगे, जब तक शहर को फिर से हरा-भरा नहीं बना देते।”
10 लेन प्रोजेक्ट के लिए कटेंगे 7,871 पेड़
गौरतलब है कि एनएचएआई द्वारा अयोध्या बायपास को आसाराम तिराहे से रत्नागिरि तिराहे तक 10 लेन में विकसित किया जा रहा है। लगभग 836 करोड़ रुपए की इस परियोजना के तहत कुल 7,871 पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है। पर्यावरणविदों का दावा है कि वास्तविक संख्या 10 हजार से अधिक हो सकती है। पिछले सप्ताह नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा परियोजना को सशर्त अनुमति मिलने के बाद पेड़ों की कटाई तेज कर दी गई। रत्नागिरि तिराहे से आसाराम तिराहे तक कई स्थानों पर मशीनों से लगातार पेड़ काटे जा रहे हैं, जिससे स्थानीय नागरिकों में भारी नाराजगी है।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें
* पेड़ों की अंधाधुंध कटाई तत्काल रोकी जाए।
* काटे गए प्रत्येक पेड़ के बदले कम से कम 10 पौधे लगाए जाएं और उनकी दीर्घकालिक देखरेख सुनिश्चित की जाए।
* पर्यावरणीय क्षति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
* सड़क चौड़ीकरण के विकल्प के रूप में एलिवेटेड रोड या कम चौड़ाई वाले मॉडल पर पुनर्विचार किया जाए।
पर्यावरण बनाम विकास की बहस तेज
अयोध्या बायपास परियोजना ने भोपाल में “विकास बनाम पर्यावरण” की बहस को फिर से तेज कर दिया है। एक ओर सरकार और एनएचएआई इसे यातायात सुधार और शहर के विकास के लिए जरूरी बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पर्यावरणविदों का कहना है कि दशकों पुराने वृक्षों की भरपाई केवल पौधारोपण से संभव नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि पेड़ों की कटाई नहीं रोकी गई, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे