अनूपपुर: स्वास्थ्य विभाग के चिकित्साक सहित 100 कर्मचारियों के संलग्नीकरण निरस्त, मूल पदस्थापना पर लौटने का आदेश

 


अनूपपुर, 21 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, डा. अलका तिवारी ने बुधवार को 100 चिकित्सा अधिकारी, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, नार्सिग नार्सिग आर्फिसर एवं महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता सहित अन्य विभिन्न कार्यालयों एवं स्वास्थ्य संस्थानों में किए गए संलग्नीकरण तत्काल प्रभाव से निरस्त कर मूल पदस्थापना वाली संस्था में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। जिसमें 17 चिकित्सा अधिकारी, 1 फार्मासिस्ट, 5 लैब टेक्नीशियन, 14 नार्सिग नार्सिग आर्फिसर एवं 21 महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता सहित 42 अन्य शामिल हैं।

ज्ञात हो कि 26 सितंबर को प्रमुख सचिव, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, के निर्देशों तथा स्वास्थ्य आयुक्तालय द्वारा आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में दिए गए निर्देशों के पालन में यह कार्रवाई की गई है। इसके साथ ही क्षेत्रीय संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं, रीवा संभाग के आदेश का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें विभिन्न प्रकार के संलग्नीकरण एवं लगाए गए ड्यूटी आदेश निरस्त करने के निर्देश दिए गए थे।

डॉक्टरों से लेकर नर्सिंग स्टाफ तक पर लागू होगा आदेश

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, डा. अलका तिवारी ने बताया कि यह आदेश चिकित्सा अधिकारियों, संविदा चिकित्सा अधिकारियों, नर्सिंग ऑफिसरों, एएनएम, लैब टेक्नीशियन, एमपीडब्ल्यू, महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, वार्ड बॉय, स्वीपर सहित विभिन्न पदों पर कार्यरत कर्मचारियों के संलग्नीकरण निरस्त करते हुए मूल पदस्थापना में वापस कर दिया गया हैं। इसमे जिला चिकित्सालय अनूपपुर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, उप स्वास्थ्य केंद्र और विभिन्न विकासखंडों में पदस्थ कर्मचारी शामिल हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था सुधारने पर जोर

उन्होंथने स्पष्ट किया है कि संलग्नीकरण निरस्त करने की कार्रवाई कार्यालय कलेक्टर अनूपपुर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय तथा प्रमुख खंड चिकित्सा अधिकारी कार्यालयों से किए गए संलग्नीकरण के संबंध में की गई है। इसका उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित करना और शासन के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना बताया गया है। इस आदेश के बाद स्वास्थ्य विभाग में कर्मचारियों की तैनाती व्यवस्था में बदलाव होने की संभावना है। हालांकि, विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में वास्तविक रूप से कितने कर्मचारी कार्यभार ग्रहण करते हैं और इससे स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर क्या प्रभाव पड़ता है, यह संबंधित संस्थानों में आदेश के क्रियान्वयन के बाद स्पष्ट होगा।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला