अशोकनगर में ‘महाराज’ विवाद: आमंत्रण पत्र पर विपक्ष भड़का, कहा- संविधान की भावना का उल्लंघन
अशोकनगर, 05 अप्रैल (हि.स.)।
मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में केंद्रीय मंत्री एवं क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के दौरे के दौरान प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। एसडीएम कार्यालय की ओर से जारी एक सरकारी आमंत्रण पत्र में सिंधिया के नाम के आगे ‘श्रीमंत महाराज’ लिखे जाने पर विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई है और इसे संविधान की भावना के विपरीत बताया है।
आमंत्रण पत्र से शुरू हुआ विवाद
विवाद उस समय सामने आया जब अशोकनगर एसडीएम द्वारा जारी निमंत्रण पत्र में सांसद सिंधिया के नाम के साथ ‘श्रीमंत महाराज’ उपाधि का उपयोग किया गया। नगरपालिका में नेता प्रतिपक्ष रीतेश जैन आजाद ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में इस प्रकार की शाही उपाधियों का प्रयोग अनुचित है।
संविधान का हवाला देकर उठाए सवाल
रीतेश जैन ने रविवार को कहा कि भारत लोकतांत्रिक गणराज्य है, जहां शाही उपाधियों को समाप्त किया जा चुका है। उन्होंने संविधान संशोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि 1971 में 26वें संशोधन के माध्यम से पूर्व रियासतों की विशेष उपाधियां समाप्त कर दी गई थीं। ऐसे में सरकारी दस्तावेज में इस तरह की भाषा का प्रयोग प्रशासन की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाता है और संविधान की मूल भावना के विपरीत है।
प्रशासन और सत्ता पक्ष पर आरोप
विपक्षी नेता ने प्रशासन के साथ-साथ सत्तापक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिले में जन समस्याएं मौजूद हैं, लेकिन जनप्रतिनिधि और अधिकारी प्रोटोकॉल और औपचारिकताओं से आगे बढ़कर चापलूसी में व्यस्त दिखाई दे रहे हैं। विवाद के बाद यह मुद्दा स्थानीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है, जबकि प्रशासन की ओर से इस मामले पर अब तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
हिन्दुस्थान समाचार / देवेन्द्र ताम्रकार