अशोकनगर: कागजों में दौड़ीं ट्रेनें, धरातल पर यात्री परेशान, रेल मंत्रालय के आदेशों का मखौल!
अशोकनगर, 29 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अशोकनगर रेलवे स्टेशन पर भारतीय रेलवे का एक अजीबोगरीब और गैर-जिम्मेदाराना रवैया सामने आया है। यहां रेल मंत्रालय का बाकायदा लिखित आदेश जारी होने के बावजूद महीनों बाद भी ट्रेनों का वास्तविक संचालन शुरू नहीं हो सका है। रेलवे की इस सुस्ती का खामियाजा क्षेत्र के हजारों दैनिक यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। यात्री रोज इस उम्मीद में स्टेशन आते हैं कि शायद आज ट्रेन रुकेगी, लेकिन उनके हाथ सिर्फ कोरी घोषणाएं और आश्वासन ही लगते हैं।
सोगरिया-दानापुर एक्सप्रेस का गुमशुदा स्टॉपेजयात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे बोर्ड के संयुक्त निदेशक (कोचिंग) राजेश कुमार के पत्र (दिनांक 12 मार्च 2026) द्वारा सोगरिया-दानापुर एक्सप्रेस (ट्रेन क्रमांक: 19801/19802) के अशोकनगर स्टेशन पर कमर्शियल स्टॉपेज की आधिकारिक घोषणा की गई थी।जमीनी हकीकत में आदेश जारी हुए कई हफ्ते बीत चुके हैं, लेकिन यह ट्रेन आज भी अशोकनगर स्टेशन को ऐसे बाय-बाय बोलकर निकल जाती है, जैसे यहाँ कोई स्टेशन ही न हो।
बीना-गुना-रूठियाई मेमो के बढ़े फेरे सिर्फ फाइलों में दर्ज
इसी तरह, रेलवे बोर्ड के निदेशक (कोचिंग) संजय आर.नीलम के पत्र (दिनांक 15 अप्रैल 2026) द्वारा बीना-रूठियाई मेमो (ट्रेन क्रमांक: 61611/61612) के फेरे बढ़ाए जाने की घोषणा की गई थी।वहीं मेमो ट्रेन के यात्रियों की मांग रही है कि क्षेत्र के नौकरीपेशा, व्यापारियों और छात्रों की विशेष मांग थी कि इस मेमो ट्रेन का वापसी का समय रात्रि 8: 00 बजे के स्थान पर संशोधित कर रात्रि 8: 45 बजे किया जाए, ताकि देर शाम काम से छूटने वाले लोगों को इसका वास्तविक लाभ मिल सके। अब हकीकत ये है कि फेरे बढऩा तो दूर, समय में बदलाव की फाइल भी विभाग के किसी कोने में धूल खा रही है।
ढोल-नगाड़ों से हुआ था स्वागत, अब पसरा सन्नाटा:जब मार्च और अप्रैल में ये दोनों आदेश आए थे, तो क्षेत्र के यात्रियों और जनप्रतिनिधियों ने अत्यंत हर्ष के साथ रेलवे के इस फैसले का स्वागत किया था। स्टेशन पर उत्साह का माहौल था कि अब सफर आसान होगा। किंतु आदेश जारी होने के कई सप्ताह बीत जाने के बाद भी रेल प्रशासन गहरी नींद से नहीं जागा है।
“जब ट्रेन चलानी ही नहीं थी, तो यात्रियों को झूठी उम्मीद क्यों दी?”
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. योगेश मिश्रा ने रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि रेलवे बोर्ड केवल आदेश जारी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता है, लेकिन उन्हें धरातल पर लागू करने की कोई गंभीर पहल नहीं होती। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी और अव्यवस्थाओं के बीच यात्री रोज परेशान हो रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं की सुध लेने वाला कोई नहीं है। डॉ. मिश्रा ने तंज कसते हुए पूछा कि यदि ट्रेनों का संचालन शुरू ही नहीं करना था, तो आखिर यात्रियों को घोषणाओं का “लॉलीपॉप” क्यों दिया गया? साथ ही उन्होंने रेलवे प्रशासन से जल्द निर्णय लेकर यात्रियों को राहत देने की मांग की।
जनप्रतिनिधियों के समय पर टिकी ट्रेनों की रफ्तार!इस पूरे मामले में जब भोपाल रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) शिवशंकर से बात की गई, तो उनका कहना था कि रेलवे द्वारा उक्त ट्रेन संचालन के लिए जनप्रतिनिधियों को चिटठी लिखी गई है। उनसे समय मिलते ही उक्त ट्रेनों का संचालन (हरी झंडी दिखाकर) शुरू कर दिया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / देवेन्द्र ताम्रकार