अशोकनगर: कटौती और लो-वोल्टेज का करंट दम तोड़ रहे उद्योग
अशोकनगर, 17 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अशोकनगर में रोजगार उपलब्ध कराने की मांग जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रीय सांसद से लगातार की जाती रही है, लेकिन शासन-प्रशासन के स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई धरातल पर नजर नहीं आती। रोजगार के अभाव के बीच यदि कुछ स्थानीय उद्यमी अपने जोखिम पर उद्योग स्थापित भी करते हैं, तो बिजली की बदहाली उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ी हो जाती है।
बिजली विभाग और उद्योग विभाग के बीच की यह आपसी जंग अब स्थानीय उद्यमियों के गले की फांस बन चुकी है, जिससे करोड़ों का कारोबार और स्थानीय रोजगार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। लाखों का बिल भरने के बाद भी 8-10 घंटे की कटौती और दोहरी मारअनियमित विद्युत आपूर्ति और लो-वोल्टेज की समस्या ने क्षेत्र के उद्योगों की कमर तोडक़र रख दी है।
नवीन मंडी के पास स्थित कलाकार फूड एंड बेवरेज (मिनरल वॉटर पैकेजिंग प्लांट) के संचालक विशाल कलाकार ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि उनके प्लांट में लगभग 20 से 25 स्थानीय कर्मचारी काम करते हैं। उद्योग संचालन के लिए वे हर महीने 90 हजार रुपये से लेकर 1.20 लाख रुपये तक का भारी-भरकम बिजली बिल नियमित रूप से विभाग में जमा करते हैं।इतनी बड़ी रकम चुकाने के बावजूद हकीकत यह है कि उद्योग को प्रतिदिन 8 से 10 घंटे की अघोषित बिजली कटौती और लो-वोल्टेज का दंश झेलना पड़ रहा है।
दोहरी मार झेल रहे उद्यमी: कभी अचानक हाई-वोल्टेज आने से हमारी लाखों रुपये की महंगी मशीनें फुंक जाती हैं, तो कभी वोल्टेज इतना कम होता है कि मशीनें स्टार्ट ही नहीं हो पातीं। इस लापरवाही के कारण उत्पादन ठप है और उद्योग बंद होने की कगार पर पहुंच गया है। विशाल कलाकार, संचालक (कलाकार फूड एंड बेवरेज) का कहना है कि उत्पादन शून्य, लेकिन जेब खाली कर रहे फिक्स्ड खर्चे, बिजली विभाग की इस घोर लापरवाही के कारण उत्पादन ठप होने से संचालकों को भारी आर्थिक नुकसान तो हो ही रहा है, साथ ही बिना काम के भी फिक्स्ड खर्चे उनकी जेब खाली कर रहे हैं। प्लांट बंद रहने के दौरान भी निम्नलिखित अनुमानित लागत लगातार जारी है, खर्च का प्रकारअनुमानित लागत स्थिति दैनिक श्रम व्यय (कर्मचारियों का वेतन)15,000 से 20,000 प्रतिदिनउत्पादन ठप होने पर भी देयबिजली का फिक्स्ड चार्ज 30,000 से 35,000 प्रति माहबिना बिजली उपयोग के भी अनिवार्यउत्पादन शून्य होने के बावजूद ये खर्चे लगातार जारी रहने के कारण उद्योगों की संचालन लागत आसमान छू रही है, जिससे व्यापार घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
ऊर्जा मंत्री और सांसद की चौखट पर पहुंची गुहार, दी आंदोलन की चेतावनी:विद्युत विभाग के दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर थक चुके उद्योग संचालकों ने अब बड़े स्तर पर मोर्चा खोल दिया है। समस्या के स्थायी निराकरण के लिए क्षेत्रीय सांसद और प्रदेश के ऊर्जा मंत्री को पत्र लिखकर सीधे हस्तक्षेप की मांग की गई है।पत्र में साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि यदि यही हाल रहा तो स्थानीय स्तर पर युवाओं से रोजगार छिन जाएगा और उद्योगों में ताला लगाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। उद्यमियों ने मांग की है कि औद्योगिक इकाइयों को पर्याप्त वोल्टेज के साथ निर्बाध (24&7) बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। आक्रोशित उद्यमियों का कहना है कि अगर जमीनी स्तर पर बिजली के यह हालात रहेंगे, तो आत्मनिर्भर भारत का सपना कैसे पूरा होगा? इस स्थिति को लेकर पूरे उद्योग जगत में भारी आक्रोश व्याप्त है।
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हिन्दुस्थान समाचार / देवेन्द्र ताम्रकार