अनूपपुर: 8 साल बाद भी अधूरा अनूपपुर रेलवे फ्लाईओवर, आयोग अध्यक्ष ने सीएम से मांगा हस्तक्षेप
अनूपपुर, 07 जुलाई (हि.स.)। मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिला मुख्यालय में लगभग 20 करोड़ रुपए की लागत से बन रहे रेलवे फ्लाईओवर का निर्माण कार्य आठ वर्ष बाद भी पूरा नहीं होने पर मध्यप्रदेश राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रामलाल रौतेल ने मंगलवार काे मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर त्वरित हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने निर्माण कार्य में हो रही लगातार देरी, धीमी प्रगति और आमजन को हो रही परेशानियों पर गंभीर चिंता जताई है।
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में आयोग के अध्यक्ष रामलाल रौतेल ने उल्लेख किया है कि वर्ष 2017 में स्वीकृत इस रेलवे फ्लाईओवर का निर्माण कार्य आठ वर्ष बीत जाने के बाद भी पूरा नहीं हो सका है। उन्होंने इसे अत्यंत गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि निर्माण कार्य की धीमी गति से क्षेत्र के लोगों को लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
पत्र में कहा गया है कि फ्लाईओवर निर्माण के कारण मुख्य मार्ग पर आवागमन गंभीर रूप से प्रभावित है। इसका प्रतिकूल असर आम नागरिकों, विद्यार्थियों, व्यापारियों, कर्मचारियों, मरीजों, गर्भवती महिलाओं तथा ग्रामीण क्षेत्रों से आने-जाने वाले लोगों पर पड़ रहा है। लोगों को प्रतिदिन जाम, समय की बर्बादी और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है, वहीं आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
आयोग के अध्यक्ष रामलाल रौतेल ने कहा कि इतने लंबे समय तक निर्माण कार्य लंबित रहना संबंधित विभाग और कार्यदायी एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। इससे न केवल जनहित प्रभावित हो रहा है, बल्कि शासन की विकास योजनाओं की प्रभावशीलता पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि फ्लाईओवर निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय समीक्षा कराई जाए, विलंब के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं कार्यदायी एजेंसी की जवाबदेही तय करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाए तथा निर्माण कार्य को युद्धस्तर पर शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए जाएं। साथ ही निर्माण एजेंसी और संविदाकार के विरुद्ध भी आवश्यकतानुसार कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
ज्ञात हो कि तीन माह पूर्व सेतु निगम शहडोल के एसडीओ प्रदीप सिंह बघेल ने बारिश से पहले जून तक फ्लाईओवर ब्रिज का मुख्य कार्य पूरा कर पुल पर आवागमन बहाल कर दिया जाएगा, जिससे रेलवे फाटक के दोनों ओर फंसे रहने वाले नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी।
8 साल की देरी पर ब्लैक लिस्ट करने की कलेक्टर ने दी थी चेतावनी
20 करोड़ की लागत से बन रहा यह ब्रिज पिछले 8 वर्षों से लंबित है, जबकि इसे मात्र 18 महीने में पूर्ण होना था। निर्माण की सुस्त गति को देखते हुए कलेक्टर हर्षल पंचोली ने 3 माह पूर्व ठेकेदार को 10 अप्रैल से ब्लैक लिस्ट करने और 6 प्रतिशत जुर्माना लगाने की चेतावनी दी थी। इसके बाद भी ठेकेदार अभी तक पूरा नहीं किया और न ही कलेक्टर ने ब्लैक लिस्ट किया।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला