अनूपपुर: जिले में एक और हाथी का प्रवेश, रात में घरों में तोड़फोड़ कर फसलों बनाया आहार

 




अनूपपुर, 21 अप्रैल (हि.स.)। छत्तीसगढ़ सीमा से लगे मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में जंगली हाथियों का उत्पात लगातार जारी है। पिछले 114 दिनों से तीन हाथियों का एक समूह जिले में विचरण कर रहा हैं। वहीं मंगलवार की सुबह पांचवा हाथी छत्तीसगढ़ के मरवाही से जिले में प्रवेश कर अपने तीन अन्य साथियों के साथ मिलकर धनगवां बीट के जंगल में विचरण कर रहा है।

एक दंतैल हाथी जिला मुख्यालय अनूपपुर से 8 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत खांड़ा के जंगल में विगत 14 दिनों से विचरण कर रहा है। धीरे-धीरे जिले में हाथियों द्वारा रहवास क्षेत्र बनाए जाने से जिले के ग्रमीण परेशान एवं भयभीत है। वहीं इस वर्ष हाथी के हमले से दो ग्रामीणों की मृत्युक के बाद भी परिजनों को अब तक सहायता राशि नहीं मिल सकी हैं। जबकि ग्रामीणो के घरों,खेत एवं बाडियों में हाथियों द्वारा किए गए विभिन्न तरह के नुकसान की राहत राशि अब तक नहीं मिली हैं। दो सप्ताह से दो दलों में बटे हाथियों के समूह द्वारा किए जा रहे नुकसान का राजस्व विभाग के पटवारी द्वारा ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों के बार-बार सूचना दिए जाने के बाद भी सर्वेक्षण एवं राहत का प्रकरण तैयार नहीं किए जाने से ग्रामीण परेशान है।

एक दंतैल हाथी छत्तीसगढ़ से सीमा पार कर सोमवार एवं मंगलवार की रात्रि ग्राम पंचायत चोलना एवं कुकुरगोड़ा के टोला, मोहल्ला के किनारे से होते हुए जैतहरी के धनगवां बीट के बीच 30 किमी का रास्ता तय कर धनगवां के जनवनिहा जंगल में पहुंचकर अपने अन्य तीन हाथी साथियों के साथ मिलकर दोपहर को गुंजा,डूमरउमर के जंगल में हैं। अब हाथियों की संख्या चार हो गई। देर रात जंगल से निकल कर ग्राम पंचायत पड़रिया के भलुवानटोला निवासी एवं बीट चोलना के सुरक्षाश्रमिक विक्रम सिंह के कच्चे मकान में तोड़फोड़ कर छोई गांव के मोतीलाल राठौर के मकान में तोड़फोड़ कर घर के अंदर रखे अनाज को अपना आहार बनाया, वहीं चोई गांव के रामदास राठौर के खेत में ,रामप्रसाद राठौर के खेतों में लगी फसलों को खाते हुए ग्राम चोलना के चोई गांव में स्थित मिश्चित वृक्षारोपण क्रमांक एक एवं दो में 40 से अधिक आरसीसी खम्बो,100 मीटर से अधिक फिसिंग तारो को तोड़ते हुए मंगलवार की सुबह फिर से धनगवां के जंगल में डेरा जमाये हुए हैं। वहीं एक दंतैल हाथी ग्राम पंचायत खांड़ा के जंगल में 14 वें दिन विश्राम करने बाद रात में जंगल से निकल कर बांध के किनारे बसे मोहन सिंह के कच्चे मकान को तीसरी बार पहुंच कर तोड़ते हुए तहस-नहस कर घर में रखें विभिन्न तरह की सामग्रियों को तोड़मरोड़ कर नष्ट करते हुए पड़ोस में बोधन सिंह के बांडी में लगी कटहल को खाया, वहीं वन विभाग का गश्ती दल ग्रामीणों के साथ देखने जाने पर अचानक तेजी से चिंघाड़ कर सभी की ओर हमला करने के उद्देश्य दौड़ाया।

हाथियों के समूह द्वारा 4 माह के मध्य दो ग्रामीणों पर हमला कर मृत किए जाने के कई माह व्यतीत हो जाने पर भी वन विभाग के द्वारा मृतकों के परिजनों को अब तक सहायता राशि प्रदान नहीं किए जाने से ग्रामीणों में नाराजगी है। राजस्व विभाग द्वारा हाथियों द्वारा किए अनेकों ग्रामों के ग्रामीण जनों के घरों खेत एवं बाडियों में किए गए नुकसान का अब तक राहत राशि नहीं मिलने,विगत दो सप्ताह के मध्य हाथियों द्वारा किए गए कई ग्रामों में नुकसान का संबंधित पंचायत के हल्का पटवारी को ग्रामीण एवं ग्रामीण जनप्रतिनिधियों द्वारा निरंतर सूचना दिए जाने के बाद भी स्थल पर पहुंचकर सर्वेक्षण का काम नहीं किया जिससे पीड़ित ग्रामीण अपने टूटे हुए घरों के मलबे को एकत्रित एवं व्यवस्थित नहीं कर पा रहे हैं।

वन मंडल अधिकारी डेविट बेंकटराव ने बताया कि एक मृतक के परिजनों को मुआवजा दिया जा चुका है, दूसरे के परिजनों में आपसी विवाद के कारण मुआवजा देने में देरी हो रही है शीघ्र ही इस समस्या का समाधान कर परिजनों को मुआवजा दिया जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला