अनूपपुर: मांगों को लेकर सड़क पर उतरे आंगनबाड़ी कर्मी और किसान-मजदूर, दी गिरफ्तारी
अनूपपुर, 10 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में अखिल भारतीय फैडरेशन एवं सीटू के संयुक्त आह्वान पर सोमवार को जिला मुख्यालय में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं, किसानों और मजदूर यूनियनों ने अपनी ज्वलंत समस्याओं व 23 सूत्रीय मांगों को लेकर जेल भरो सत्याग्रह राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन किया।
इस दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका एकता यूनियन (सीटू), मध्यप्रदेश किसान सभा, कोयला श्रमिक संघ, जनवादी महिला समिति और अन्य सहयोगी संगठनों ने धरना देते विरोध जताया और 'जेल भरो सत्याग्रह' के तहत अपनी आवाज बुलंद की। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए अनूपपुर, चचाई, देवहरा व फुनगा पुलिस चौकी बल के साथ फायर ब्रिगेड और बज्र वाहन मौके पर तैनात रहे।प्रदर्शन के दौरान दोपहर 4 बजे कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तारी दी, जहां पुलिस ने वाहन में कार्यकर्ताओं को वाहन में बैठते रेलवे अंडर ब्रिज धरना स्थल से अमरकंटक तिराहा से घुमाते रास्ते में छोड़ दिया। इस दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई।
प्रदर्शन के दौरान आंगनबाड़ी कर्मियों ने अपनी मुख्य समस्या उजागर करते हुए बताया कि केंद्र सरकार के 'पोषण ट्रैकर ऐप' में सर्वे से लेकर सभी 11 रजिस्टरों का काम पहले से किया जा रहा है। इसके बावजूद मध्यप्रदेश सरकार द्वारा अलग से 'संपर्क ऐप' में वही काम दोहराने के लिए मजबूर किया जा रहा है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क न मिलने के कारण कार्यकर्ताओं को 3-4 किमी दूर पहाड़ियों या मकानों की छतों पर जाना पड़ता है। सर्वर डाउन रहने या ऐप में काम अपलोड न दिखने पर कार्यकर्ताओं का 7 से 15 दिन तक का मानदेय काट लिया जाता है। सरकार द्वारा दिए गए पुराने 3G मोबाइल में नया वर्जन लोड नहीं होता। ई-केवाईसी और फेस कैप्चर में काफी परेशानियां आ रही हैं। डिजिटल काम के बाद भी 11 रजिस्टर ऑफलाइन तैयार करवाए जा रहे हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने राज्य शिक्षा केंद्र के उस आदेश (दिनांक 27.03.2024) का कड़ा विरोध किया, जिसके तहत 15 जून 2024 से पांच जिलों (भोपाल, छिंदवाड़ा, सीहोर, सागर और शहडोल) के 1415 विद्यालयों में केजी-1 व केजी-2 की कक्षाएं शुरू की गई हैं।
संघ ने चेतावनी दी कि यदि आंगनबाड़ी के बच्चे स्कूलों में जाएंगे तो आईसीडीएस (ICDS) योजना का मूल उद्देश्य प्रभावित होगा। संघ ने इस आदेश को तुरंत निरस्त कर आंगनबाड़ी केंद्रों में ही केजी-1 व केजी-2 की शिक्षा व्यवस्था शुरू करने की मांग की। सत्याग्रह के माध्यम से संयुक्त मंच ने केंद्र और राज्य सरकार के समक्ष चारों काली श्रम संहिताओं को समाप्त कर ठेका, आउटसोर्सिंग व फिक्स टर्म प्रथा बंद की जाए। सभी श्रमिकों को 26,000 रुपये प्रतिमाह न्यूनतम वेतन, 8 घंटे का कार्यदिवस और सामाजिक सुरक्षा/पेंशन दी जाए। आंगनबाड़ी, आशा-ऊषा, पर्यवेक्षक और मध्याह्न भोजन कर्मियों को शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाए। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश (C2+50%) के अनुसार सभी फसलों की एमएसपी पर खरीदी का कानून बने, किसानों का कर्ज माफ हो और खाद वितरण से टोकन प्रणाली खत्म की जाए, बिजली संशोधन विधेयक 2025 रद्द हो, स्मार्ट मीटर की लूट बंद की जाए और राष्ट्रीय मौद्रीकरण नीति वापस ली जाए, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता रद्द करने, मनरेगा में 200 दिन काम व 700 रुपए मजदूरी देने, भूमि अधिग्रहण कानून 2013 लागू करने और पट्टा वितरण की मांग की गई।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला