एम्स भोपाल में आईवीएफ एवं फर्टिलिटी सेंटर शुरू, संतान प्राप्ति में कठिनाई झेल रहे दंपतियों को एक ही केंद्र पर जांच

 


भोपाल, 24 अगस्त (हि.स.)। संतान प्राप्ति में कठिनाई का सामना कर रहे दंपतियों के लिए एम्स भोपाल में सोमवार को नई सुविधा शुरू की गई। प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में आईवीएफ एवं फर्टिलिटी सेंटर का शुभारंभ किया गया। यहां महिला और पुरुष, दोनों में प्रजनन संबंधी समस्याओं की जांच, विशेषज्ञ परामर्श और आवश्यकता के अनुसार आधुनिक उपचार की सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

केंद्र का उद्घाटन एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. नरेंद्र कोतवाल (रि.) ने किया। इस अवसर पर अधिष्ठाता (शैक्षणिक) प्रो. डॉ. रजनीश जोशी, उप निदेशक (प्रशासन) संदेश जैन, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. डॉ. विकास गुप्ता, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. के. पुष्पलता, आईवीएफ की नोडल अधिकारी डॉ. भारती सिंह, डॉ. अरुण डोरा और आईवीएफ परामर्शदाता डॉ. वैशाली गुरवानी सहित चिकित्सक, नर्सिंग अधिकारी और अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।

जांच के बाद जरूरत के अनुसार उपचार

केंद्र में सबसे पहले दंपतियों की प्रजनन संबंधी समस्या के कारणों की जांच की जाएगी। इसके बाद उनकी स्थिति और चिकित्सकीय आवश्यकता के आधार पर उपचार की योजना तैयार होगी। मरीजों और परिजनों को उपचार की प्रक्रिया, संभावित विकल्पों और आवश्यक सावधानियों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। महिलाओं में अंडाणु बनने और अंडोत्सर्जन की निगरानी अल्ट्रासाउंड तथा हार्मोन जांच के माध्यम से की जाएगी। आवश्यकता के अनुसार दवाओं से अंडोत्सर्जन कराया जाएगा। उपयुक्त मामलों में अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।

जरूरत पड़ने पर आईवीएफऔर आईसीएसआई

जिन दंपतियों को अधिक उन्नत उपचार की आवश्यकता होगी, उनके लिए आईवीएफ की सुविधा उपलब्ध होगी। इसमें दवाओं के माध्यम से अंडाशय को तैयार करने, अंडाणु प्राप्त करने, प्रयोगशाला में अंडाणु और शुक्राणु के निषेचन, भ्रूण तैयार करने और उसे गर्भाशय में स्थानांतरित करने जैसी प्रक्रियाएं शामिल होंगी। विशेष परिस्थितियों में आईसीएसआई तकनीक का भी उपयोग किया जा सकेगा। इसमें शुक्राणु को सीधे अंडाणु में प्रविष्ट कराया जाता है। तैयार भ्रूण को नियंत्रित वातावरण वाली आधुनिक प्रयोगशाला में विकसित किया जाएगा।

भ्रूण, अंडाणु और शुक्राणु सुरक्षित रखने की सुविधा

चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार भ्रूण, अंडाणु और शुक्राणु को भविष्य में उपयोग के लिए सुरक्षित रखने की सुविधा भी केंद्र में उपलब्ध होगी। संरक्षित भ्रूण को आवश्यकता के अनुसार बाद में गर्भाशय में स्थानांतरित किया जा सकेगा। इसके लिए गर्भाशय की आंतरिक परत को भ्रूण स्थानांतरण के लिए तैयार किया जाएगा। केंद्र में पुरुषों से जुड़ी प्रजनन संबंधी समस्याओं की भी जांच और उपचार किया जाएगा। शुक्राणु की जांच और सहायक प्रजनन उपचार के लिए उसकी तैयारी की सुविधा उपलब्ध होगी। जरूरत पड़ने पर अन्य विशेषज्ञ विभागों के साथ समन्वय कर उपचार किया जाएगा।

सुरक्षा और गोपनीयता पर विशेष जोर

एम्स भोपाल के अनुसार, केंद्र में उपचार निर्धारित सहायक प्रजनन तकनीक संबंधी नियमों, चिकित्सकीय मानकों और नैतिक सिद्धांतों के अनुरूप किया जाएगा। मरीजों की सुरक्षा और उनकी निजी जानकारी की गोपनीयता का विशेष ध्यान रखा जाएगा। किसी भी उपचार से पहले मरीज की सहमति ली जाएगी और उपचार उसकी व्यक्तिगत चिकित्सकीय जरूरत के आधार पर तय किया जाएगा। एम्स प्रबंधन के अनुसार, केंद्र का उद्देश्य केवल आईवीएफ जैसी उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि प्रजनन स्वास्थ्य के क्षेत्र में चिकित्सा सेवाओं, प्रशिक्षण और शोध को भी बढ़ावा देना है। भविष्य में केंद्र को सुरक्षित, वैज्ञानिक, नैतिक, किफायती और मरीज-केंद्रित प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं के उत्कृष्ट केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे