उज्जैनः सिंहस्थ की तैयारियों को लेकर हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक
उज्जैन, 05 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ-2028 को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में उज्जैन पुलिस ने तैयारियां तेज कर दी हैं। बुधवार को पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में एआई आधारित सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और अंतर्राज्यीय समन्वय सहित संपूर्ण सुरक्षा व्यवस्था का विस्तृत परीक्षण किया गया।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस बार करीब 30 करोड़ श्रद्धालुओं के संभावित आगमन को देखते हुए आधुनिक तकनीक और व्यापक पुलिस बल के साथ अब तक की सबसे बड़ी सुरक्षा योजना तैयार की जा रही है।
पुलिस कंट्रोल रूम में बुधवार को आयोजित बैठक में पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने सिंहस्थ-2028 के लिए तैयार की गई सुरक्षा, यातायात, भीड़ नियंत्रण, साइबर सुरक्षा और आधुनिक तकनीक आधारित व्यवस्थाओं का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। इसके बाद एडीजी राकेश गुप्ता और डीआईजी नवनीत भसीष ने प्रत्येक बिंदु पर विस्तार से चर्चा कर आवश्यक सुझाव दिए। अधिकारियों ने विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए सभी तैयारियों का नियमित परीक्षण करने पर जोर दिया।
प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि सिंहस्थ महाकुंभ का आयोजन 9 अप्रैल से 8 मई 2028 तक प्रस्तावित है। वर्ष 2016 के सिंहस्थ में जहां करीब 9 से 10 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे थे, वहीं इस बार लगभग 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। विशेष रूप से तृतीय अमृत स्नान के दिन लगभग 5 करोड़ श्रद्धालुओं के एक ही दिन में पहुंचने की संभावना को देखते हुए व्यापक सुरक्षा एवं भीड़ प्रबंधन की रणनीति तैयार की गई है।
बैठक के अंत में एडीजी राकेश गुप्ता और डीआईजी नवनीत भसीन ने निर्देश दिए कि सिंहस्थ-2028 की सभी तैयारियां समयबद्ध, तकनीक आधारित और समन्वित तरीके से पूरी की जाएं। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित वातावरण उपलब्ध कराना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है और 'सुरक्षित सिंहस्थ-सफल सिंहस्थ के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए प्रत्येक स्तर पर नियमित समीक्षा और मॉनिटरिंग की जाएगी।
416 ड्रोन रखेंगे आसमान से नजर
सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था में इस बार अत्याधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा। पूरे मेला क्षेत्र और शहर में लगभग 3500 एआई आधारित सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जबकि 416 ड्रोन लगातार हवाई निगरानी करेंगे। नदी क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए अंडरवाटर कैमरे लगाए जाएंगे और 2700 से अधिक पब्लिक एड्रेस सिस्टम स्थापित किए जाएंगे, ताकि आपात स्थिति में तत्काल सूचना प्रसारित की जा सके।
मेल क्षेत्र में होंगे 100 अधिक पार्किंग स्थल
यातायात प्रबंधन को लेकर भी विस्तृत रणनीति तैयार की गई है। उज्जैन आने वाले इंदौर, देवास, मक्सी, आगर, गरोठ, नागदा, उन्हेल और बडऩगर मार्गों को सात रणनीतिक गेटवे जिलों से जोड़कर नियंत्रित किया जाएगा। शहर के बाहरी क्षेत्र में लगभग 3200 हेक्टेयर भूमि पर 100 से अधिक पार्किंग स्थल विकसित किए जाएंगे, जहां प्रतिदिन करीब 2.20 लाख वाहनों और 52.60 लाख श्रद्धालुओं की क्षमता के अनुरूप व्यवस्था रहेगी। बैठक में रेलवे और सीमावर्ती राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय को भी प्राथमिकता दी गई।
उज्जैन, नईखेड़ी, चिंतामण, विक्रम नगर और पिंगलेश्वर रेलवे स्टेशनों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए विशेष व्यवस्था विकसित करने तथा सीमावर्ती जिलों में होल्डिंग एरिया और पार्किंग तैयार करने की योजना पर भी चर्चा हुई।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्वेल