अनूपपुर: अडानी की कंपनी ने केवई नदी पर बांध बना रोका जल प्रवाह, कांग्रेस ने किया प्रदर्शन
अनूपपुर, 23 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले कोतमा क्षेत्र में स्थित अडानी कंपनी की अनूपपुर थर्मल पावर परियोजना द्वारा नदी पर बनाए गए एनीकेट (बांध) को लेकर क्षेत्र में जल संकट गहरा गया है।
मझौली पंचायत अंतर्गत निर्मित इस बांध के कारण कोतमा, पसान नगर पालिका सहित नदी किनारे बसे आधा सैकड़ा से अधिक गांवों में पेयजल संकट उत्पन्न हो गया है। जिसे लेकर सोमवार को जिला पंचायत सदस्य रामजी रिंकू मिश्रा और गुड्डू चौहान के नेतृत्व में ग्रमीणों ने बांध स्थल पहुंचकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया। बढ़ती भीड़ और जनप्रतिनिधियों के आक्रोश को देखते हुए राजस्व एवं पुलिस अधिकारी, साथ कंपनी प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन की मौजूदगी में बांध के नीचे से आंशिक रूप से पानी छोड़ा गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि एक ओर कंपनी के बांध में पानी लबालब भरा है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र की बड़ी आबादी को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। लगातार तीन दिनों से जल संकट झेल रहें।
अनूपपुर जिला कांग्रेस अध्यक्ष गुड्डू चौहान ने बताया कि ग्राम छतवाई, कोठी जहां से जिले की शुरुआत होती है और केवई नदी का प्रवेश होता है वहीं पर अदानी कंपनी ने अन्य कट बंद बनाकर पानी रोक रखा था जिससे जिले के कोतमा, पसान एवं बिजुरी नगरी निकाय में जल संकट खड़ा हो गया था इसके साथ ही इसे लगे कई ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के पानी का अभाव लगातार हो रहा था। जिसे लेकर सोशल मीडिया में लोगों ने इस संकट के बारे में बताया जिस पर कांग्रेस ने आज प्रदर्शन कर रेत का बना बंद को हटवाया और पक्का ऐनीकट बाध को तोड़ने की बात प्रशासन और अदानी कंपनी के अधिकारियों से कहीं।
कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने बताया कि अदानी कंपनी को जल संसाधन विभाग की अनुमति में अस्थाई एनीकट बांध बनाने को कहा गया था किंतु कंपनी ने नियमों को धता बताते हुए पक्का निर्माण कर पानी रोकने का प्रयास किया है। साथ ही कंपनी ने इस बांध के बाद 9 बैराज बनाने की योजना है जिसका विरोध किया जाएगा साथ ही जब तक नदी पर बना पक्का निर्माण नहीं तोड़ा जाएगा तब तक हम शांत नहीं बैठेंगे।
जिला पंचायत सदस्य रामजी रिंकू मिश्रा के साथ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बांध निर्माण के साथ नदी के ऊपर अस्थायी सड़क भी बनाई गई है, जिससे नदी के प्राकृतिक प्रवाह और जलीय जीवों के अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न हो गया है। साथ ही अवैध ब्लास्टिंग से नदी का पानी दूषित होने की आशंका भी जताई गई। बैराज बनाते समय पहले तो कंपनी ने ग्रामीणों से यह बात कही थी कि हम केवई नदी की धार को नहीं रोकेंगे हम सोन नदी से पाइप लाइन के माध्यम से पानी लाएंगे। और यहां स्टॉक करेंगे मगर गुपचुप तरीके से कंपनी ने केवई नदी की धार को रोककर बैराज भरने की कोशिश की जिससे नदी की धार सूखने की नौबत आ गई। ग्रामीणों के साथ कांग्रेस ने इसका विरोध किया और कंपनी को नदी की बहती हुई धार को खोलना पड़ा।
छावनी में तब्दील रहा क्षेत्र
सोमवार सुबह से ही मझौली और खमरौध पंचायत की सीमा पर बने बैराज स्थल पर बड़ी संख्या में युवाओं की भीड़ जुटने लगी। संभावित तनाव को देखते हुए प्रशासन अलर्ट रहा। बिजुरी, कोतमा, रामनगर और भालूमाड़ा थाना क्षेत्रों का पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया। नायब तहसीलदार सहित प्रशासनिक अधिकारी सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक मौके पर मौजूद रहे।
ज्ञापन सौंपकर समाधान की मांग
प्रदर्शनकारियों ने नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर अवैध रूप से निर्मित एनीकेट को हटाने, जल संकट से राहत दिलाने और नदी में प्राकृतिक जल प्रवाह बहाल करने की मांग की। इस दौरान मझौली सरपंच चंदा पनिका, उमरदा सरपंच अखलेश सिंह, रफी अहमद, अभिषेक साहू सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।
नायब तहसीलदार लवीतेद्र सिंह ने बताया कि जिसका विरोध हो रहा था उसे खुलवा दिया गया है पानी की धार नदी में बहने लगी है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला