मंदसौरः अर्हं योग प्रणेता मुनिश्री प्रणम्यसागरजी महाराज के मंगल प्रवेश पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
मन्दसौर, 07 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मंदसौर मे दिगम्बर जैन मुनि अर्हं योग प्रणेता मुनिश्री प्रणम्यसागरजी महाराज का 11 वर्षों पश्चात संघ सहित नगर आगमन हुआ। मुनिश्री के आगमन को लेकर समाज में अत्यंत उत्साह का माहौल बना हुआ था।
मुनिश्री का रविवार प्रात: 5.30 बजे बोतलगंज गांधी हर्बल से पद विहार प्रारंभ हुआ। 7.30 बजे महावीर द्वार चौराहा पर बैंडबाजों, ढोल व हाथी घोड़ों के साथ विशाल जन सैलाब ने मुनि संघ की अगवानी की। सकल जैन समाज द्वारा मुनिश्री का पाद प्रक्षालन कर पूजन आरती की गई। मंगल प्रवेश की शोभायात्रा में महिला मंडल सर पर मंगल कलश व जैन चिन्ह के साथ आगे चल रही थी। समाज के युवा नाचते गाते भक्ति करते हुए मुनिश्री के साथ चल रहे थे। जय जय गुरुदेव की गूंज के साथ भक्तगणों ने पूरे मार्ग को भक्ति के रंग से सराबोर कर दिया।
विहार पूरे मार्ग को सुन्दर रंगोलीयों से सजाया गया था। मुनिश्री के तार बंगला मंदिर पहुंचने पर समाज के नन्हे बच्चों ने गुरुदेव की मंगल अगवानी करते हुए भक्ति नृत्य किया। मंदिर परिसर के बाहर पंडाल में बने विशाल मंच पर प्रणम्यसागरजी महाराज व चारों ऐलक महाराज विराजित हुए। मुनिश्री ने विशाल जनसमुदाय को संबोधित करते हुए प्रवचन में कहा कि अपनी आत्मा के विकास के लिए ह्यह्यऊँ अर्हं नम:ह्णह्ण का जाप करे। इस छोटे से मंत्र के उच्चारण से पंच परमेष्ठी और चौबीस तीर्थंकर के स्मरण का जाप हो जाता है। मुनिश्री ने कहा ऊँ अर्हं आत्मिक व मानसिक शांति प्रदायक मंत्र है। उन्होंने कहा धर्म के मर्म को समझें क्योंकि धर्म दिखावे का नाम नहीं,धर्म तो स्वयं के भीतर महसूस करने का नाम है।
मुनिश्री ने अपने प्रवचनों के दौरान बताया पंच परमेष्ठी की पंचमुद्राओं के साथ योगाभ्यास का बीजारोपण मंदसौर से हुआ था, योग शारीरिक व्यायाम ना रह जाए,यह आत्मा के साथ जुड़े, क्यों कि अर्हं योग मानसिक शांति का कारक है। उन्होंने कहा भगवान आदिनाथ व भगवान बाहुबलि ने भी योग साधना की तो अनंत सुख व आत्म तत्व की प्राप्ति की। मुनिश्री ने कहा ध्यान के बिना योग अधूरा है, अर्हं योग से हर आत्मा परम आत्म तत्व की ओर उन्मुख हो सकती है।
प्रवचन से पूर्व नमन जैन व चिन्मय कियावत द्वारा प्रोजेक्टर के माध्यम से अर्हं योग की दस वर्षीय यात्रा की झलकियां दिखाई गई, उन्होंने बताया भारत के साथ 14 देशों में अर्हं योग पहुंच गया है। विश्व के 10 लाख श्रद्धालु इससे जुड़े हैं। अर्हं योग के माध्यम से गौशाला, चिकित्सा, समाजसेवा, धर्म सेवा, शिक्षा, संस्कार सहित अनेक प्रकल्प चलाये जा रहे हैं।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / अशोक झलोया