शहडोल: प्लास्टिक बोतलों के पुनः उपयोग से जल एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश
शहडोल, 03 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के शहडोल जिला कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने बुधवार को कार्यालय एवं घरों में स्तेमाल होने वाले प्लास्टिक की बोतलों को बाहर कचरे के रूप में न फेककर प्लास्टिक के बोतलों का पुनर्उपयोग करते हुए ड्रिप एरिगेशन के रूप में उपयोग करने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि कार्यालयों एवं घरों में उपयोग होने वाली प्लास्टिक बोतलों को कचरे में फेंकने के बजाय पौधों की सिंचाई हेतु बॉटल ड्रिप मॉडल के रूप में उपयोग करने का आह्वान किया गया है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ जल संरक्षण की दिशा में एक प्रभावी और व्यवहारिक कदम मानी जा रही है। स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा अब तक 30 हजार से अधिक प्लास्टिक बोतलों का पुनः उपयोग कर उन्हें ड्रिप सिंचाई प्रणाली में लगाया जा चुका है। यह प्रयास प्लास्टिक कचरे को कम करने और जल संसाधनों के बेहतर उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है।
बॉटल ड्रिप मॉडल के माध्यम से पौधों को आवश्यकता अनुसार धीरे-धीरे पानी उपलब्ध कराया जा सकता है। इसके लिए प्लास्टिक बोतलों का उपयोग विभिन्न तरीकों से किया जा सकता है। छोटे गमलों एवं क्यारियों के लिए बोतल के ढक्कन में बारीक छेद कर उसे पानी से भरकर उल्टा गाड़ा जा सकता है, जबकि बड़े पौधों के लिए बोतल के किनारे छोटे छेद कर उसे पौधे की जड़ों के पास स्थापित किया जा सकता है। इसके अलावा सूती धागे अथवा कपड़े की पट्टी की सहायता से विक मॉडल तैयार कर लंबे समय तक बूंद-बूंद सिंचाई की व्यवस्था भी की जा सकती है।
जिला प्रशासन ने सभी विभाग प्रमुखों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों से आग्रह किया है कि वे अपने कार्यालयों और आवासीय परिसरों में इस मॉडल को अपनाएं तथा विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून के अवसर पर बोतलों से तैयार ड्रिप सिंचाई व्यवस्था एवं पौधों के साथ अपने फोटो साझा कर इस जन-अभियान को सफल बनाएं। प्रशासन का संदेश है कि “प्लास्टिक का पुनः उपयोग करें, जल बचाएं और पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दें।” यह छोटी पहल न केवल प्लास्टिक प्रदूषण को कम करेगी बल्कि पौधों के संरक्षण और जल की बचत में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला