मुरैनाः रिमझिम बारिश से मौसम हुआ सुहाना, दिन भर नहीं हुए सूर्यदेव के दर्शन
मुरैना, 8 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में मंगलवार-बुधवार की मध्यरात्रि से शुरू हुई रिमझिम बारिश ने पूरे शहर के मौसम का मिजाज बदल दिया। आसमान दिन भर घने काले बादलों से ढका रहा, जिसके कारण बुधवार को सूर्य देव के दर्शन नहीं हुए। लगातार रुक-रुककर होती बारिश से वातावरण में ठंडक घुल गई और पिछले कई दिनों से भीषण उमस व गर्मी से परेशान लोगों को बड़ी राहत मिली।
बारिश के चलते शहर में सामान्य जनजीवन भी प्रभावित रहा। सुबह से ही बाजारों में लोगों की आवाजाही कम रही, जिससे सामान्य दिनों की तुलना में व्यापारिक गतिविधियां भी सुस्त दिखाई दीं। कई लोग आवश्यक कार्य होने पर ही घरों से बाहर निकले, जबकि अधिकांश ने मौसम का आनंद लेते हुए घरों में रहना ही उचित समझा। लगातार हो रही हल्की बारिश के कारण शहर के कई प्रमुख मार्गों और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। पानी निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से कई स्थानों पर पानी लंबे समय तक जमा रहा, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
जलभराव के कारण सड़कों पर कीचड़ और गंदगी फैल गई, जिससे दोपहिया वाहन चालकों को विशेष कठिनाई हुई। बारिश ने नगर निगम की सफाई व्यवस्था और जल निकासी तंत्र की भी पोल खोल दी। कई स्थानों पर नालियों का पानी सड़कों पर बहता दिखाई दिया, जिससे गंदगी और दुर्गंध की समस्या बढ़ गई। स्थानीय लोगों ने बताया कि हल्की बारिश में ही यदि यह स्थिति बन रही है तो तेज बारिश के दौरान हालात और भी गंभीर हो सकते हैं।
शहर की पहले से क्षतिग्रस्त सड़कें बारिश के कारण और अधिक खराब हो गई हैं। जगह-जगह बने गड्डों में पानी भर जाने से वाहन चालकों को गड्ढों का अंदाजा नहीं लग पा रहा है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। कई स्थानों पर दोपहिया वाहन चालक फिसलते-फिसलते बचे और लोगों को सावधानी के साथ आवागमन करना पड़ा। हालांकि किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए यह बारिश राहत लेकर आई है।
शहरवासियों ने नगर निगम प्रशासन से जलभराव वाले क्षेत्रों में पानी निकासी की समुचित व्यवस्था करने, नालियों की नियमित सफाई कराने तथा क्षतिग्रस्त सड़कों की शीघ्र मरम्मत कराने की मांग की है, ताकि आगामी दिनों में संभावित तेज बारिश के दौरान लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा