उज्जैनः महाकाल महालोक में स्थापित होंगी पत्थर और धातु की 92 प्रतिमाएं
उज्जैन, 25 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकाल महालोक में पत्थर और धातु से बनी 92 प्रतिमाएं स्थापित होंगी। 35 पत्थर की तथा 57 धातु की प्रतिमाएं शामिल है। प्रतिमा निर्माण से पहले भगवान के स्वरूप का स्केच विशेषज्ञों की समिति के माध्यम से अनुमोदित किया जाता है। इसके बाद स्वीकृत स्केच के अनुरूप प्रतिमाओं को आकार दिया जाता है। कार्यशाला में तैयार की जा रही प्रतिमाएं पुराणों में वर्णित स्वरूप एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर बनाई जा रही है। प्रतिमा निर्माण का कार्य उज्जैन के साथ ही ग्वालियर एवं जयपुर में भी किया जा रहा है।
यह जानकारी संभागायुक्त आशीष सिंह ने दी। उन्होने कलेक्टर रौशन कुमार सिंह के साथ शुक्रवार को निर्माण कार्यो का निरीक्षण किया। उन्होने प्रतिमा निर्माण कार्यशाला एवं निर्माणाधीन सडक़ और ब्रिज कार्यों का निरीक्षण किया।
महाकालेश्वर महालोक में स्थापित की जाने वाली पत्थर एवं धातु की प्रतिमाओं के निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। इसके साथ ही उन्होंने डी मार्ट के सामने निर्माणाधीन नवीन सडक़ मार्ग एवं शिप्रा नदी पर निर्माणाधीन ब्रिज के कार्यों का भी जायजा लिया। संभागायुक्त श्री सिंह ने संबंधित अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसियों को कार्यों में गति लाने के साथ गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए।
इसके बाद संभागायुक्त एवं कलेक्टर ने डी मार्ट के सामने निर्माणाधीन नवीन सडक़ मार्ग का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि नवीन सडक़ की लंबाई लगभग 900 मीटर तथा चौड़ाई 18 मीटर है। संभागायुक्त ने मौके पर उपस्थित संबंधित एजेंसी के इंजीनियरों को निर्देश दिए कि बारिश का दौर कम होने के बाद सडक़ निर्माण के शेष कार्य को अब तेज गति से पूर्ण किया जाए। उन्होंने निर्माण कार्य में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने तथा निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बारिश के पानी की निकासी के लिए पर्याप्त एवं प्रभावी व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए, ताकि भविष्य में मार्ग पर जलभराव की स्थिति उत्पन्न न हो। शिप्रा नदी पर निर्माणाधीन ब्रिज के कार्य का भी निरीक्षण किया। मौके पर निर्माण कार्य की प्रगति की जानकारी लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। संभागायुक्त ने निर्देश दिए कि वर्षा काल के बाद अब ब्रिज निर्माण कार्य में गति लाई जाए। निर्माण कार्य को गुणवत्ता के साथ निर्धारित गति से आगे बढ़ाने तथा कार्य में अनावश्यक विलंब नही होने देने के निर्देश दिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्वेल