अनूपपुर: हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष: अमरकंटक में राष्ट्रीय संगोष्ठी में विरासत, वर्तमान और भविष्य पर मंथन

 




अनूपपुर, 31 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक में रविवार को हिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमे हिंदी पत्रकारिता की द्विशताब्दी यात्रा: विरासत, वर्तमान तथा भविष्य’ विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी में देशभर के विद्वानों, शोधार्थियों और पत्रकारों ने भाग लेकर हिंदी पत्रकारिता की भूमिका, चुनौतियों और संभावनाओं पर व्यापक चर्चा की।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अवधेश कुमार शुक्ल ने हिंदी पत्रकारिता को समाज का दर्पण बताते हुए कहा कि इसका अतीत गौरवशाली रहा है और आज यह वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता से समाज को बड़ी अपेक्षाएं रहती हैं, इसलिए इसे सदैव सामाजिक सद्भाव, सत्य की खोज और लोक कल्याण के प्रति समर्पित रहना चाहिए। उन्होंने वर्तमान चुनौतियों का उल्लेख करते हुए विश्वास जताया कि हिंदी पत्रकारिता इन पर विजय प्राप्त करेगी।

प्रख्यात चिंतक प्रो. आलोक श्रोत्रिय ने हिंदी पत्रकारिता की ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि इसने समाज को जागरूक करने में अहम योगदान दिया है। उन्होंने सत्यनिष्ठा, वस्तुनिष्ठता और सकारात्मक दृष्टिकोण को रचनात्मक पत्रकारिता की आधारशिला बताया। मुख्य वक्ता डॉ. सर्वेश त्रिपाठी (इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, नई दिल्ली) ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने देश की स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने ‘उदन्त मार्तंड’ के प्रकाशन को याद करते हुए पंडित युगलकिशोर शुक्ल के आदर्शों को आज भी प्रासंगिक बताया। उनके अनुसार तकनीक और हिंदी के बढ़ते बाजार ने पत्रकारिता के विस्तार में नई ऊर्जा दी है।

डिजिटल युग में बदलती पत्रकारिता

भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली के डॉ. पवन कौंडल ने कहा कि डिजिटल मीडिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के कारण पत्रकारिता के स्वरूप में तेजी से बदलाव आया है। उन्होंने बताया कि आज पाठकों की रुचि, समाचारों की प्रस्तुति और उन्हें ग्रहण करने के तरीकों में व्यापक परिवर्तन देखने को मिल रहा है।

तकनीकी सत्र में विशिष्ट अतिथि डॉ. सुनील कुमार मिश्र ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता की आत्मा उसका लोक से जुड़ाव है। उन्होंने चेताया कि बाजार और तकनीक के प्रभाव के बीच पत्रकारिता को अपनी जड़ों से जुड़े रहना होगा। हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. जितेंद्र सिंह ने कहा कि हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता ने स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि आज हिंदी पत्रकारिता का दायरा व्यापक हो रहा है, ऐसे में इसके दायित्व भी बढ़ गए हैं।

पत्रकार और पूर्व छात्रों का हुआ सम्मान,

इंदिरा गांधी नेशनल जनजाति विश्वविद्यालय से पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में अध्यापन कर अनूपपुर जिले पत्रकारिता में विशेष स्थान रखने वाले पूर्व छात्र एवं जिले के पत्रकार शैलेन्द्र विश्वकर्मा और रामभुवन गौतम को अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। वहीं विभाग ने जानकारी दी की आगामी सत्र में पूर्व छात्रों का मिलन समारोह भी आयोजित किए जाने की संभावना है जिसमें विश्वविद्यालय के वह पूर्व छात्र जो वर्तमान में देश भर के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग संस्थानों में अपनी सेवा दे रहे हैं और विश्वविद्यालय का नाम रोशन कर रहे हैं उनकी एक मिलन समारोह और संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। संगोष्ठी ने यह स्पष्ट किया कि हिंदी पत्रकारिता ने अपनी 200 वर्षों की यात्रा में सामाजिक चेतना, सत्यनिष्ठा और जनसरोकारों को हमेशा प्राथमिकता दी है। बदलते समय और तकनीकी चुनौतियों के बावजूद इसकी मूल भावना आज भी प्रासंगिक है और भविष्य में भी समाज के मार्गदर्शन में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

देशभर से शोधार्थियों की सहभागिता

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुआ। विषय प्रवर्तन प्रो. राघवेंद्र मिश्रा ने किया, जबकि स्वागत भाषण प्रो. मनीषा शर्मा ने दिया। संचालन शुभी विश्वकर्मा और धन्यवाद ज्ञापन अभिलाषा एलिस तिर्की द्वारा किया गया।

संगोष्ठी में कुल 53 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए, जबकि 12 राज्यों से ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। तकनीकी सत्रों में विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों ने शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम का संयोजन अंशुल अग्रवाल, नितिन मिश्रा, आकांक्षा चितवन, शुभी विश्वकर्मा सहित अन्य सदस्यों द्वारा किया गया।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला