जबलपुरः घमापुर में सुबह 6 बजे से पड़ा रहा बेसहारा, साढ़े चार घंटे बाद पहुंची मदद

 


जबलपुर, 10 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर की आपातकालीन स्वास्थ्य और पुलिस व्यवस्था पर गुरुवार सुबह उस समय गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब बेलबाग थाना क्षेत्र के घमापुर चौराहे पर एक व्यक्ति करीब चार घंटे तक सड़क पर पड़ा रहा। स्थानीय लोगों के मुताबिक, व्यक्ति की हालत खराब थी और मदद के लिए 108 एंबुलेंस तथा 112 पुलिस सेवा पर लगातार फोन किए गए। दावा है कि करीब 40 से 50 बार कॉल किए जाने के बावजूद काफी देर तक मौके पर न एंबुलेंस पहुंची और न पुलिस।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, व्यक्ति सुबह करीब 6 बजे से घमापुर चौराहे के मुख्य मार्ग पर पड़ा था। लोगों ने उसकी हालत देखकर तत्काल सरकारी आपातकालीन सेवाओं से संपर्क करने का प्रयास किया। करीब 10:30 बजे तक वह वहीं पड़ा रहा। यह मार्ग हाईकोर्ट क्षेत्र से एसपी कार्यालय की ओर जाता है और दिनभर यहां बड़ी संख्या में लोगों और वाहनों की आवाजाही रहती है। इसके बावजूद उसे समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिल सकी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार सूचना देने के बाद पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। आरोप है कि पुलिस की ओर से किसी व्यक्ति को साथ चलकर विक्टोरिया अस्पताल ले जाने की बात कही गई और निजी ऑटो से अस्पताल पहुंचाने का सुझाव दिया गया। वहीं, 108 एंबुलेंस सेवा से संपर्क करने पर कथित तौर पर बताया गया कि सभी एंबुलेंस व्यस्त हैं और तत्काल वाहन उपलब्ध नहीं है। इसके बाद लोगों को निजी साधन से व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने के लिए कहा गया।

मामले को लेकर सीएमएचओ नवीन कोठारी से जब बात की गई तो उनका कहना था कि इस घटना में जांच के बाद यदि लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। लोगों की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहने वाला स्वास्थ्य विभाग किसी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगा।

घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल 108 और 112 की आपातकालीन रिस्पॉन्स व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। यदि दर्जनों बार कॉल किए जाने के बावजूद चार घंटे तक मदद नहीं पहुंची तो इन कॉल पर क्या कार्रवाई हुई? कॉल सेंटर ने संबंधित सूचना किसे भेजी? एंबुलेंस उपलब्ध नहीं थी तो वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? पुलिस को सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचने में कितना समय लगा?

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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक