बाणसागर जलाशय में लगाए जाएंगे 10 हजार केज, नवंबर में शुरू होगा एक हजार केज लगाने का काम

 




शहडोल, 07 नवंबर (हि.स.)। बाणसागर जलाशय में मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 10 हजार केज लगाए जाएंगे। इसके प्रथम चरण में नवंबर माह के दौरान दो कंपनियों द्वारा 500-500 केज लगाने का काम शुरू किया जाएगा।

यह जानकारी शनिवार को कलेक्ट्रेट में कृषि, उद्यानिकी, सहकारिता, मत्स्यपालन, कृषि अभियांत्रिकी एवं पशुपालन विभाग की योजनाओं की समीक्षा बैठक में दी गई। कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने अधिकारियों को योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कर पात्र हितग्राहियों और किसानों को समय पर लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए।

बैठक में उद्यानिकी विभाग की समीक्षा के दौरान बताया गया कि मसाला विस्तार योजना के तहत जिले के तीन जनपदों के 29 गांवों में किसानों को मसाला धनिया उत्पादन से जोड़ा जाएगा। कलेक्टर ने किसानों को इसके लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए।

कृषि विभाग की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने रासायनिक उर्वरकों और बीजों के नियमित नमूने लेकर प्रयोगशालाओं में गुणवत्ता परीक्षण कराने को कहा। गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर संबंधित संस्थाओं के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने की कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने किसानों को कतार में बुवाई के प्रति जागरूक करने और कृषि अधोसंरचना के निर्धारित लक्ष्यों को शीघ्र पूरा करने पर भी जोर दिया।

बैठक में बताया गया कि जिले में अब तक 2,511 मीट्रिक टन उर्वरक का वितरण किया जा चुका है, जबकि 11,261 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है। इसके अलावा चना और मसूर का 15,943 क्विंटल बीज भी उपलब्ध है। किसान इसे सहकारी समितियों के माध्यम से खरीद सकते हैं।

प्राकृतिक खेती की समीक्षा में बताया गया कि जिले में 25 बीआरसी स्थापित किए गए हैं और 4,375 किसान प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं। योजना के तहत प्रत्येक बीआरसी को एक लाख रुपये तथा प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को प्रतिवर्ष चार-चार हजार रुपये का अनुदान दिया जाएगा। कलेक्टर ने अधिक से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने के निर्देश दिए।

पशुपालन विभाग की योजनाओं की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने डॉ. भीमराव अंबेडकर डेयरी योजना, आचार्य विद्यासागर योजना, मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना और मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित करने को कहा। उन्होंने विशेष रूप से बैगा हितग्राहियों को योजनाओं से जोड़ने, बकरी पालन को प्रोत्साहित करने तथा कृत्रिम गर्भाधान और सेक्स्ड सीमेन से गर्भाधान को बढ़ावा देने के निर्देश दिए।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला