विश्व पर्यावरण दिवस पर हरियाली के दावे, लेकिन चितरा में धूल और प्रदूषण से लोग परेशान

 


देवघर, 05 जून (हि.स.)। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एक ओर जहां ईस्टर्न कोल फील्ड की चितरा परियोजना एवं शताक्षी महिला मंडल की ओर से पौधारोपण और पौधा वितरण कार्यक्रम आयोजित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।

वहीं दूसरी ओर खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों ने प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरणीय प्रबंधन को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। पुनर्वास स्थल बनवारी डंगाल में आयोजित कार्यक्रम में कोलियरी महाप्रबंधक मदन मोहन कुमार सहित अन्य सदस्यों ने फलदार पौधों का रोपण किया। इस दौरान ग्रामीणों के बीच आम, कटहल और अमरूद के पौधों का वितरण भी किया गया।

हालांकि स्थानीय लोगों ने परियोजना क्षेत्र में व्याप्त धूल, प्रदूषण, पेयजल संकट तथा लगाए गए पौधों के रखरखाव को लेकर चिंता व्यक्त की। ग्रामीणों का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण के नाम पर अभियान तो चलाए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रदूषण नियंत्रण की व्यवस्थाएं अपेक्षित रूप से प्रभावी नहीं दिखतीं।

स्थानीय लोगों के अनुसार चितरा (ईस्ट) ओपनकास्ट परियोजना से उड़ने वाली धूल खून गांव विस्थापित स्थल, बनवारी डंगाल, दमगढ़ा, न्यू कॉलोनी, पुरानी कॉलोनी सहित आसपास के कई क्षेत्रों को प्रभावित कर रही है। सड़कों, घरों और सार्वजनिक स्थलों पर धूल की परत जमना आम बात हो गई है। धूल नियंत्रण के लिए खरीदे गए वाटर स्प्रिंकलर वाहनों का समुचित उपयोग नहीं हो रहा है। दो नए स्प्रिंकलर वाहन लंबे समय से खड़े हैं, जबकि सड़क सफाई और धूल हटाने वाली मशीनें भी निष्क्रिय पड़ी हुई हैं। कई स्थानों पर केवल औपचारिक रूप से पानी का छिड़काव किया जाता है, जिससे समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि खदान के आसपास स्थित अस्पताल परिसर तक धूल की चपेट में है। वहीं डीएवी स्कूल, बाल विद्या मंदिर, उच्च विद्यालय और मध्य विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ रही है। उनका मानना है कि लंबे समय तक धूल और प्रदूषित वातावरण के संपर्क में रहने से बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

वहीं ईसीएल प्रबंधन का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षारोपण, जल संरक्षण, भूमि पुनर्वास, हरित पट्टी विकास और प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित विभिन्न कार्य नियमित रूप से किए जा रहे हैं। प्रबंधन का दावा है कि कोयला उत्पादन और पर्यावरणीय संतुलन के बीच सामंजस्य बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / Anup Kumar Roy