खादानों में वन सीमा की दूरी मानक से पत्थर उद्योग संकट में : चंद्रेश्ववर सिंह

 


रांची, 02 मई (हि.स.)।

झारखंड स्टेट स्टोन इंडस्ट्री एसोशिएसन की महत्वपूर्ण बैठक शनिवार को मेन रोड स्थित बिरसा विहार में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए संघ के अध्यक्ष चंद्रेश्ववर प्रसाद सिंह ने कहा कि उच्च न्यायालय में लंबित जनहित याचिका के आलोक में खनन पट्टों की वन सीमा से दूरी 400 मीटर तथा क्रशर इकाइयों की दूरी 500 मीटर निर्धारित किए जाने से राज्य के अधिकांश खनन पट्टों और क्रशर इकाइयों के कांसेंट टू ऑपरेटर (सीटीओ) पर रोक लग गई है, यह गलत है। दूरी मानक से पत्थर उद्योग गंभीर संकट में पहुंच गया है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में राज्य सरकार ने दूरी मानक 500 मीटर से घटाकर 250 मीटर किया था। उसी नियम के आधार पर व्यवसायियों ने लाइसेंस लेकर खदानों और क्रशर इकाइयों में निवेश किया तथा बैंक ऋण भी लिया। अब नई स्थिति से उद्योग संचालकों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है। चंद्रेश्ववर सिंह ने कहा कि यदि वर्तमान व्यवस्था जारी रही तो राज्य की 60 से 80 प्रतिशत पत्थर खदानें और क्रशर इकाइयां प्रभावित होकर बंद हो सकती हैं। इससे हजारों मजदूरों की आजीविका पर असर पड़ेगा, सरकार को राजस्व हानि होगी और गिट्टी की आपूर्ति बाधित हो सकती है।

संघ ने सरकार से नियमों में व्यावहारिक संशोधन, रॉयल्टी दरों की समीक्षा तथा उद्योग हित में त्वरित निर्णय लेने की मांग की। बैठक में विभिन्न जिलों से आए व्यवसायियों ने मुख्यमंत्री से मिलकर समस्याओं के समाधान की मांग करने का निर्णय लिया। संघ के सचिव पंकज सिंह ने वन सीमा से दूरी, आरसीडी से संबंधित मामलों, खनन रॉयल्टी एवं अन्य विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

बैठक में मुख्य रूप से रामाशीष सिंह, नितिन गुप्ता, अरुण सिंह, मुकेश सिंह, बिरजू पाठक, जगदीप अग्रवाल, आशित मंडल, मोहन ग्रोवर, शैलेंद्र मेहता, राजेश मेहता, रामेश्वर पंडित, अशोक धानुका, प्रेम कुमार, अमित पांडे, उज्जवल सिंह, चित्तौदा, विकास सिंह, सम्राट सिंह, ढीहचंद मेहता सहित अन्यम लोग शामिल थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar