संयम केवल पूजा नहीं, जीवन की साधना : मुनिश्री

 




रामगढ़, 21 सितंबर (हि.स.)। दसलक्षण महापर्व के छठे दिन सोमवार को रामगढ़ शहर के मेन रोड स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर एवं रांची रोड स्थित पार्श्वनाथ जिनालय में उत्तम संयम धर्म की आराधना से श्रद्धालु भक्तिरस में डूबे नजर आए। सुबह से ही जिनालयों में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता रहा। भगवान जिनेन्द्र देव के अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन में महिला-पुरुष, युवा और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर पुण्यार्जन किया। सुगंध दशमी पर धर्म और भक्ति का विशेष उल्लास देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने भगवान जिनेन्द्र की पूजा-अर्चना कर धूप अर्पित की।

धार्मिक मान्यता के अनुसार सुगंध दशमी आत्मशुद्धि, संयम, सदाचार और जीवन में सद्गुणों की सुगंध फैलाने का संदेश देती है। सागर, मध्य प्रदेश से पधारे पंडित संदीप शास्त्री के तत्वावधान में अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन की धार्मिक क्रियाएं विधि-विधान से संपन्न हुईं। वहीं मध्य प्रदेश से आए संगीतकार अनुराग जैन के भक्ति संगीत ने जिनालय परिसर को आध्यात्मिक उल्लास से भर दिया।

श्री दिगंबर जैन मंदिर में उमड़ा पुण्यार्जन का उत्साह

शहर के मेन रोड स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में पाण्डुशिला पर विराजमान शीतलनाथ भगवान की अष्टधातु प्रतिमा पर कलश अभिषेक का पुण्यार्जन राज कुमार एवं ऋषभ कुमार काला परिवार ने किया। शांतिधारा का पुण्यार्जन इंद्रमणि देवी चूड़ीवाल के पुत्र ललित चूड़ीवाल की सुपुत्री स्नेहा बाकलीवाल, गुवाहाटी निवासी, के दसलक्षण व्रत की ओर अग्रसर होने के उपलक्ष्य में समस्त चूड़ीवाल परिवार ने किया। वही, चंद्रप्रभु भगवान की प्राचीन प्रतिमा पर कलश अभिषेक का पुण्यार्जन महावीर प्रसाद, नरेंद्र, नीलेश, रौनक एवं ऋषभ छाबड़ा परिवार ने किया। जबकि, महावीर भगवान की प्राचीन प्रतिमा पर कलश अभिषेक का पुण्यार्जन पुष्पा अजमेरा परिवार ने किया। इसके अलावा बेदी पर विराजमान तीनों बड़ी प्रतिमाओं पर कलश अभिषेक का पुण्यार्जन ललिता रावका परिवार, नितिन, मनीषा, तलीश एवं ईशान पाटनी परिवार तथा मानिक चंद जैन, मीना देवी, अंकित, राहुल, मार्धव, अद्विक एवं त्रिशा पाटनी परिवार ने किया। आदिनाथ भगवान की बड़ी प्रतिमा पर शांतिधारा का पुण्यार्जन भी ललिता रावका परिवार ने किया।

पार्श्वनाथ जिनालय में भी गूंजे भक्तिगीत

रांची रोड स्थित 1008 श्री पार्श्वनाथ जिनालय में भी दिनभर धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला चलता रहा। प्रथम अभिषेक का पुण्यार्जन नागरमल गंगवाल परिवार ने किया। शांतिधारा का पुण्यार्जन प्रमोद, नीरज एवं बबलू सेठी परिवार ने बिट्टू, विशाखा एवं चित्राक्षी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में किया। शांतिधारा में सुचिता सेठी ने सहयोग राशि प्रदान की। संध्या आरती का पुण्यार्जन विनोद एवं संगीता सेठी परिवार ने किया।

संयम केवल पूजा नहीं, जीवन की साधना : मुनिश्री

दसलक्षण महापर्व के धार्मिक कार्यक्रम मुनिश्री 108 पुण्यानंद जी महाराज, मुनिश्री 108 शुभानंद जी महाराज एवं क्षुल्लकश्री 105 दिव्यानंद जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य में संपन्न हो रहे हैं। मुनिश्री 108 शुभानंद महाराज ने उत्तम संयम धर्म का महत्व बताते हुए कहा कि संयम केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे विचार, वाणी और व्यवहार में उतारना आवश्यक है। इंद्रियों पर नियंत्रण, मर्यादित जीवन, आत्मनिरीक्षण और सदाचार के माध्यम से संयम को जीवन का हिस्सा बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि संयम व्यक्ति के जीवन में आत्मशुद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है और उसे बाहरी आकर्षणों से ऊपर उठाकर आत्मकल्याण की दिशा में ले जाता है। कार्यक्रम की जानकारी मीडिया प्रभारी श्रवण जैन ने दी।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश