उर्दू भाषा के संरक्षण के लिए आगे आएं युवा पीढ़ी, 108 विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा

 


रामगढ़, 05 नवंबर (हि.स.)। उर्दू भाषा और तहजीब के संरक्षण और नई पीढ़ी में इसके प्रति रुचि बढ़ाने के उद्देश्य से अंजुमन फरोग-ए-उर्दू, रामगढ़ प्रखंड इकाई की ओर से गुरुवार को उत्क्रमित मध्य विद्यालय जरियो में प्रखंड स्तरीय उर्दू प्रतियोगिता आयोजित की गई।

प्रतियोगिता में प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों से आए 108 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इसमें उर्दू सामान्य ज्ञान और उर्दू सुलेख की प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा और भाषा पर पकड़ का शानदार प्रदर्शन किया।

प्रतियोगिता प्रभारी इकबाल अहमद की देखरेख और पर्यवेक्षक रमीज-उर-रहमान के पर्यवेक्षण में संपन्न हुई। प्रतिभागियों को तीन वर्गों में बांटा गया था। जूनियर वर्ग में 11 से 14 वर्ष, मिडिल वर्ग में 15 से 18 वर्ष और सीनियर वर्ग में 19 से 22 वर्ष तक के विद्यार्थियों को शामिल किया गया।

उर्दू सामान्य ज्ञान की सीनियर श्रेणी में नेहा परवीन ने प्रथम, इरम फातिमा ने द्वितीय और नेमत जमील ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। मिडिल श्रेणी में फिरदौश अंजुम प्रथम, रानी परवीन द्वितीय और शहाना परवीन तृतीय रहीं। वहीं जूनियर श्रेणी में सना फिरदौश ने प्रथम, तसबीहा फिरदौश ने द्वितीय और मोजाहिद रजा ने तृतीय स्थान हासिल किया।

उर्दू सुलेख की सीनियर श्रेणी में सलमा परवीन प्रथम, सायरा मुस्तफा द्वितीय और फिरदौश जहां तृतीय स्थान पर रहीं। मिडिल श्रेणी में शहजादा बेलाल ने प्रथम, मो. साजिद अंसारी ने द्वितीय और हबीबा परवीन ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। जूनियर श्रेणी में मो. अब्दुल्लाह प्रथम, अबू रेहान अंसारी द्वितीय और मेहर परवीन तृतीय स्थान पर रहीं।

अंजुमन फरोग-ए-उर्दू के जिला कमेटी सदस्य सह रामगढ़ प्रखंड प्रभारी इकबाल अहमद ने बताया कि प्रत्येक वर्ग की दोनों प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले कुल 18 प्रतिभागियों को जिला स्तरीय पुरस्कार वितरण समारोह में सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा प्रत्येक वर्ग के प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को जिला स्तरीय प्रतियोगिता में शामिल होने का अवसर मिलेगा। वहां चयनित प्रतिभागियों को भी सम्मानित किया जाएगा।

जिला कमेटी सदस्य सह प्रखंड पर्यवेक्षक रमीज-उर-रहमान ने कहा कि अपनी भाषा और संस्कृति की रक्षा की जिम्मेदारी हमें स्वयं उठानी होगी। उर्दू हमारी मातृभाषा है और इसकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। इस तरह की प्रतियोगिताओं का उद्देश्य बच्चों में उर्दू पढ़ने-लिखने के प्रति रुचि जगाना, उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करना और भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

प्रतियोगिता को सफल बनाने में हाजी रईस खान, मुफ्ती इजहार रिजवी, मौलाना मरगूब आलम, मौलाना सरफराज अहमद, कारी इम्तियाज अंबर सहित अन्य लोगों की भूमिका रही।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश