कालाजार निदान व प्रबंधन पर कार्यशाला आयोजित

 


देवघर, 29 अप्रैल (हि.स.)। राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, वेक्टर जनित रोग नियंत्रण, झारखंड के निर्देश पर बुधवार काे एम्स, देवघर में कालाजार और पीकेडीएल के निदान और प्रबंधन पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

इस कार्यशाला का उद्देश्य दुमका, गोड्डा, पाकुड़, साहिबगंज, देवघर और जामताड़ा सहित विभिन्न जिलों के चिकित्सा पदाधिकारियों, स्वास्थ्यकर्मियों और मेडिकल संस्थानों के डॉक्टरों की क्षमता को बढ़ाना था, ताकि कालाजार के जटिल मामलों का प्रभावी उपचार सुनिश्चित किया जा सके।

कार्यक्रम में राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ बिरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि झारखंड ने वर्ष 2023 में कालाजार उन्मूलन का लक्ष्य हासिल कर लिया है और इसे बनाए रखने के लिए बहुआयामी प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने समन्वित प्रयास और तकनीकी दक्षता को इस दिशा में बेहद महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम में कार्यकारी निदेशक प्रो डॉ नितिन एम गंगाने ने कहा कि मेडिकल कॉलेज उपचार के साथ-साथ अनुसंधान और प्रशिक्षण के जरिए भी कालाजार उन्मूलन में अहम भूमिका निभाते हैं। तकनीकी सत्रों के दौरान आईसीएमआर-आरएमआरआईएमएस के निदेशक डॉ कृष्णा पांडे ने जटिल और पुनरावृत्ति वाले मामलों में सटीक निदान और प्रोटोकॉल आधारित उपचार की आवश्यकता पर जोर दिया।

वहीं आईपीजीएमआर, कोलकाता की प्रो डॉ मिताली चटर्जी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पीकेडीएल मामलों की समय पर पहचान और उपचार को जरूरी बताया। विशेषज्ञों ने आधुनिक तकनीकों, विशेषकर क्यू-पीसीआर आधारित जांच को कालाजार के त्वरित और सटीक निदान में उपयोगी बताया। कार्यशाला में विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा के साथ भविष्य की कार्ययोजना पर भी विचार-विमर्श किया गया।

इस अवसर पर वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के प्रतिनिधियों, पिरामल स्वास्थ्य, ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटजीज, राज्य और जिला स्तर के अधिकारियों, कंसल्टेंट्स और स्वास्थ्यकर्मियों सहित 60 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के समापन पर राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम कालाजार उन्मूलन के लक्ष्य को मजबूत करने के साथ जमीनी स्तर पर उपचार और प्रबंधन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / Anup Kumar Roy