जेल से बाहर निकले जेएलकेएम नेता का कार्यकर्ताओं ने किया स्वागत

 


रामगढ़, 31 मार्च (हि.स.)। रामगढ़ के गोला पीसीआर कांड के विरोध में आवाज उठाने पर करीब 17 दिनों तक जेल की सलाखों के पीछे रहे झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) नेता संतोष महतो और उनके साथी देवानंद महतो, शिवनंदन मुंडा और शहबाज अनवर गोल्डी के मंगलवार को जेल से बाहर निकलते ही समर्थकों ने उनका स्वागत किया।

मौके पर संतोष महतो ने प्रशासन और स्थानीय सत्ताधारियों पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस कांड में दो निर्दोष संथाली युवाओं अजीत हेम्ब्रम और सागर हेम्ब्रम की जान गई, उस मामले में न्याय मांगने वालों को ही अपराधी बनाकर जेल भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि जेल की दीवारें सच्चाई और ईमानदारी को कैद नहीं कर सकतीं। प्रशासन ने हम पर झूठे आरोप लगाकर आंदोलन को दबाने की कोशिश की, लेकिन आज हमारी रिहाई ने साबित कर दिया कि जीत अंततः सत्य की ही होती है।

उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवार को दिए गए 10 हजार और 25 किलो चावल के मुआवजे को भद्दा मजाक करार दिया।

संतोष महतो और देवानंद महतो ने अपनी तीन सूत्री मांगों को दोहराते हुए कहा कि जब तक घटना के प्रत्येक पीड़ित परिवार को 20 लाख का मुआवजा, सरकारी नौकरी और दोषी पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज नहीं होता, तब तक यह लड़ाई खत्म नहीं होगी। इस दौरान जेएलकेएम के कई कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश