जल संरक्षण दिवस पर विद्यार्थियों और शिक्षकों ने लिया जल बचाने का संकल्प
रामगढ़, 04 नवंबर (हि.स.)। नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत जल संरक्षण दिवस के अवसर पर मंगलवार को जिले के लगभग 50 विद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में 5,000 से अधिक विद्यार्थियों और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और जल संरक्षण का संकल्प लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को जल के महत्व, उसके सीमित संसाधनों तथा भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल संरक्षण की आवश्यकता के प्रति जागरूक करना था।
इस अवसर पर विद्यालयों में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने जल संरक्षण की शपथ ली। साथ ही दैनिक जीवन में पानी की उपयोगिता, पर्यावरण संतुलन और जल संसाधनों के संरक्षण पर अपने विचार साझा किए। विद्यार्थियों को बताया गया कि जल जीवन का आधार है और इसकी बर्बादी रोकना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को पानी का अनावश्यक उपयोग नहीं करने, जरूरत के अनुसार ही जल खर्च करने, उपयोग के बाद नल बंद रखने और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया गया। इसके अलावा तालाबों, कुओं और अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण के महत्व की भी जानकारी दी गई।
शिक्षकों ने विद्यार्थियों से जल संरक्षण के संदेश को अपने परिवार, मित्रों और आसपास के लोगों तक पहुंचाने की अपील की। उन्हें समझाया गया कि छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर पानी की बर्बादी को रोका जा सकता है। जल संरक्षण केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास से ही इसे प्रभावी बनाया जा सकता है।
इस पहल का उद्देश्य बच्चों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता विकसित करना है, ताकि वे भविष्य में जल संरक्षण के प्रति जागरूक नागरिक बन सकें। जिले के 50 विद्यालयों में आयोजित इस अभियान के माध्यम से समाज में जल बचाने का संदेश व्यापक स्तर पर प्रसारित किया गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश