झारखंड में बाहरी लोगों को बसाने का मुद्दा सदन में गूंजा, नीरा यादव ने उच्चस्तरीय जांच की उठाई मांग
रांची, 27 फरवरी (हि.स.)। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शुक्रवार को ग्रामीण विकास विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के समय राज्य में बाहरी लोगों को बसाए जाने का मामला जोरदार तरीके से उठा। भाजपा विधायक नीरा यादव ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की।
सदन में चर्चा के दौरान नीरा यादव ने कहा कि झारखंड के कई क्षेत्रों में बाहर से लोगों को लाकर व्यवस्थित रूप से बसाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों के आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र भी बनवाए जा रहे हैं। उनके अनुसार विशेष समुदाय के माध्यम से यह कार्य कराया जा रहा है, जिससे राज्य की जनसंख्या संरचना और स्थानीय अधिकारों पर प्रभाव पड़ सकता है।
विधायक ने कहा कि बाहर से आए लोग सप्ताह में एक दिन जंगलों की कटाई कर जमीन तैयार करते हैं और वहां स्थायी रूप से बस जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य में 50 से अधिक ऐसे गांव चिन्हित किए जा सकते हैं, जहां इस प्रकार लोगों को बसाया गया है।
उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि आदिवासी और मूलवासी परिवारों को भूमि पट्टा देने में उदासीनता बरती जा रही है, जबकि बाहरी लोगों को जमीन उपलब्ध कराई जा रही है। यह गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
नीरा यादव ने राज्य सरकार की वित्तीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई विभागों द्वारा स्वीकृत बजट राशि का समुचित उपयोग नहीं किया जा सका है और कई विभाग 50 प्रतिशत राशि भी खर्च नहीं कर पाए हैं। उपयोगिता प्रमाण पत्र समय पर केंद्र सरकार को नहीं भेजे जाने के कारण केंद्रीय अनुदान प्राप्त करने में भी बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं।
इस पर विभागीय मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने सदन को बताया कि पेयजल एवं स्वच्छता (पीएचईडी) विभाग में वर्ष 2024 तक लगभग 6260 करोड़ रुपये की राशि लंबित है। वहीं मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने स्पष्ट किया कि संबंधित मामलों को लेकर आवश्यक बैठक पहले ही आयोजित की जा चुकी है।
विधायक ने राज्य में संचालित आवास योजनाओं की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पांच लाख गरीब परिवारों के लिए प्रस्तावित आवास निर्माण की प्रगति स्पष्ट नहीं है। अबुआ आवास योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना में अनियमितताओं की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। कई लाभुकों को स्वीकृति मिलने के बावजूद समय पर किस्त नहीं मिलने से मकान अधूरे रह जाते हैं और जर्जर होकर गिरने की स्थिति में पहुंच जाते हैं।
उन्होंने मांग की कि शिविरों में प्राप्त आवेदनों की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए तथा अंचल कार्यालयों में लंबित आवेदनों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही गोड्डा जिले में कार्यपालक पदाधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई की भी मांग सदन में उठाई।------------
हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar