सरहुल पर व्रतियों ने रखा उपवास, 21 को निकलेगी भव्य शोभायात्रा

 


रांची, 20 मार्च (हि.स.)। राजधानी रांची सहित सरहुल पर्व को उत्सारह देखा जा रहा है। सरहुल पर्व के अनुष्ठातन के अनुसार श्रद्धालुओं ने शुक्रवार की शाम में 7.30 बजे हातमा तालाब से पानी लाकर दो घड़ों में पानी भरा। वहीं इसके पूर्व श्रद्धालु दिनभर उपवास पर रहे। साथ ही नदी तालाबों से मछली केकड़ा पकडने की विधि पूरी की गई। शनिवार की सुबह 08 बजे बारिश होने की सूचना मुख्य पहान जगलाल पाहन की ओर से दी जायेगी। इसके अलावा पांच मुर्गों की बली भी दी जाएगी। मुख्य पाहन जगलाल पाहन ने बताया कि शनिवार को सरहुल समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन भी शामिल होंगे।

इधर, सिरमटोली स्थित केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की ने सभी श्रद्धालुओं से पारंपरिक वेशभूषा और वाद्य यंत्र जैसे ढाक, नगाड़ा और मांदर के साथ शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु डीजे का सीमित उपयोग करें, ताकि आदिवासी संस्कृति और परंपरा को संरक्षित रखा जा सके।

साथ ही, भीड़ को देखते हुए बच्चों की सुरक्षा के लिए उनके पास नाम, पता और मोबाइल नंबर रखने की भी सलाह दी गई है।

रांची में सरहुल शोभायात्रा 59 वें साल में किया प्रवेश

राजधानी रांची में प्रकृति पर्व सरहुल शोभायात्रा 59 वें साल में प्रवेश करेगा। रांची में सबसे पहले वर्ष 1967 में सरहुल शोभायात्रा की शुरूआत हुई थी। इस शोभायात्रा में 100 लोग शामिल हुए थे। इसमें कार्तिक उरांव, डॉ रामदयाल मुंडा सहित अन्य लोगों ने मुख्य भूमिका निभाई थी।

पहली शोभायात्रा हातमा सरना स्थल से शुरू हुई थी, जो रेडियम रोड, अल्ब र्ट एक्का चौ, जयपाल सिंह मुंडा चौक होते हुए सिरमटोली सरना स्थल पहुंची थी। जहां पर विधिवत तरीके से पूजा पाठ के बाद समापन किया गया।

वहीं अब यह सरहुल शोभायात्रा एक व्यापक रूप ले चुका है, जहां लाखों की संख्या में सरना धर्मावलंबी शामिल होते हैं। मौजूदा समय में सरहुल शोभायात्रा के स्वागत के लिए सैकडों सामाजिक बुद्धिजीवी सरहुल शोभायात्रा का स्वागत करते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak