नव वर्ष के स्वागत में विहंगम योग संत समाज ने किया हवन यज्ञ

 




रांची, 01 जनवरी (हि.स.)। नव वर्ष 2026 के अवसर पर रांची में आध्यात्मिक चेतना, वैदिक परंपरा और सामाजिक सद्भाव को लेकर विहंगम योग संत समाज, रांची की ओर से गुरुवार काे दलादली स्थित फुटकल टोली में हवन-यज्ञ का आयोजन किया गया।

यह आयोजन सद्गुरुदेव आश्रम (सदाफलदेव आश्रम) परिसर में विधिविधान और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ संपन्न हुआ, जिसमें शहर सहित आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत सद्गुरु सदाफल देव भगवान के चित्र पर श्रद्धापूर्वक माल्यार्पण के साथ हुई। इसके बाद स्वागत गान और मंगलगान प्रस्तुत किया गया, जिससे पूरा आश्रम परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।

वैदिक मंत्रों के उच्चारण के बीच प्रज्वलित हवन कुंड में श्रद्धालुओं ने आहुतियां दीं। हवन से उठती पवित्र अग्नि और मंत्रों की गूंज ने वातावरण को सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया।

हवन-यज्ञ में पुरुषों, महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की उल्लेखनीय सहभागिता रही। श्रद्धालुओं ने नव वर्ष में सुख-समृद्धि, सामाजिक शांति, देश की उन्नति और विश्व कल्याण की कामना की। आयोजन के दौरान अनुशासन और धार्मिक मर्यादाओं का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और भव्यता और अधिक बढ़ गई।

नया साल आत्ममंथन और नए संकल्प लेने का समय

इस अवसर पर विहंगम योग रांची जिला के परामर्शक डॉ अनिल शर्मा ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि अंग्रेजी नव वर्ष केवल कैलेंडर बदलने का अवसर नहीं, बल्कि आत्ममंथन और नए संकल्प लेने का समय है। उन्होंने कहा कि यज्ञ सनातन संस्कृति का सबसे पवित्र कर्म है, जिससे पर्यावरण की शुद्धि होती है और मानव जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यज्ञ के माध्यम से व्यक्ति की भौतिक और आध्यात्मिक दोनों प्रकार की कामनाओं की पूर्ति संभव होती है।

उन्होंने बताया कि विहंगम योग संत समाज की ओर से अंग्रेजी नव वर्ष पर हवन-यज्ञ का आयोजन कई वर्षों से लगातार किया जा रहा है, ताकि समाज को आध्यात्मिक दिशा मिल सके। उन्होंने आगे कहा कि हम सभी का एक ही उद्देश्य समाज कल्याण, देश की प्रगति के पथ पर अग्रसर करने और लोगों के आध्यात्मिक जीवन के साथ-साथ भौतिक जीवन में भी संतुलन बनाए रखना है। विहंगम योग इसी संतुलन की शिक्षा देता है।

वहीं कार्यक्रम में उपस्थित विहंगम योग झारखंड प्रदेश के परामर्शक और झारखंड सरकार में असिस्टेंट कमिश्नर गजेंद्र सिंह ने कहा कि विहंगम योग केवल एक साधना पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की संपूर्ण कला है। यह योग व्यक्ति को न केवल जीने की कला, बल्कि मृत्यु को भी सहज रूप से स्वीकार करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि सद्गुरु सदाफल देव महाराज ने मानव कल्याण के उद्देश्य से विहंगम योग को अत्यंत सरल और व्यावहारिक रूप में समाज के सामने रखा।

उन्होंने स्वर्वेद ग्रंथ को अद्वितीय बताते हुए कहा कि इसके पठन-पाठन और मनन मात्र से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगता है और आत्मिक शांति की अनुभूति होती है।

कार्यक्रम में श्रद्धालुओं में प्रसाद का वितरण किया गया।

इस अवसर पर विहंगम योग झारखंड प्रदेश के परामर्शक विष्णु कांत खेमका, डिप्टी कलेक्टर प्रवीण सिंह, सीआईएसएफ के आईजी प्रबोध चंद्र, संयोजक सच्चिदानंद शर्मा सहित विहंगम योग के हजारों अनुयायी उपस्थित थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak