भक्ति गीत और कविता रस से सराबोर हुआ विद्यापति दलान

 




रांची, 10 अप्रैल (हि.स.)। झारखंड मैथिली मंच रांची की ओर से हरमू रोड स्थित विद्यापति दलान शुक्रवार को

भक्ति गीत और कविता रस से सराबोर हो गया। तीन दिवसीय सांस्कृरतिक कार्यक्रम में सबसे पहले मेन रोड स्थित महाकवि विद्यापति के मूर्ति पर सामूहिक रूप से माल्यार्पण किया गया। इसके बाद सांस्कृमतिक कार्यक्रमों में गीत और मधुर कविता के रस की बारिश हुई।

कार्यक्रम तीन सत्रों में हुआ। उद्घाटन सत्र का शुभारंभ विद्यानाथ झा विदित, प्रमोद कुमार झा सहित अन्य ने महाकवि विद्यापति के चित्र पर पुष्पांजलि से हुआ।

साथ ही पंडित सतीश कुमार मिश्र ने स्वस्ति वाचन और शंख ध्वनि से वातावरण को भक्तिमय कर दिया। इसके बाद भगवती बंदना जय जय भैरवि असुर भयाउनि का सामूह गान हुआ। अतिथियों को पाग-दोपटा देकर स्वागत किया गया।

कार्यक्रम में अध्यक्ष विनय कुमार झा ने अतिथियों उपस्थित समस्त लोगों का स्वागत किया।

साहित्यकारों ने माता जानकी के जीवन चरित का किया वर्णन

कार्यक्रम में डॉ परवेज हसन ने माता जानकी के शक्ति, शौर्य, धैर्य, शहनशीलता, अनुशासन और मर्यादित जीवन की चर्चा करते हुए अनेक अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला।

साहित्यिक परिचर्चा में बोकारो से आयी शैलजा झा ने नारी शक्ति पर केंद्रित कई जानकारियां दी। बोकारो से ही पहुंचे शंभूनाथ झा ने मैथिली नाट्य कला पर प्रकाश डाला।

प्रमोद कुमार झा ने माता सीता के सर्वगुण संपन्नता का जिक्र करते हुए अनेक चारित्रिक चमत्कारिक जानकारी साझा की। डॉ नरेन्द्र झा ने अनेकों उद्धरणों से माता सीता के अनेक रूप का अविश्वसनीय लेकिन सच्ची बातों का जिक्र किया। हितनाथ झा ने मैथिली भाषा साहित्य और संस्कृति के इतिहास पर आधारित ढ़ेरों प्रामाणिक तथ्यों का जिक्र करते हुए श्रोताओं को विस्तृत जानकारी दी। अंत में विद्या नाथ झा विदित ने मिथिला के सामाजिक, सांस्कृतिक, वैश्विक गरिमा की आधारशिला माता जानकी के बारे में कहा कि धरती पर बैशाख माह में माता जानकी का प्राकट्य होना अपने आप में आध्यात्मिक तथ्यों को प्रमाणित करता है।

माता जानकी से जीवन से सीखें युवतियां : महुआ माजी

उन्होंने कहा कि विदेह राजा जनक की पुत्री के रूप में अवतरित होना महज संयोग नहीं, बल्कि अनेक पुराणों में वर्णित तथ्यों का अक्षरसः सत्यता को प्रतिपादित करता है। त्रेतायुग में मिथिला भूमि पुण्य क्षेत्र के रूप में जाना जाता था। इसलिए ही माता जानकी ने अपने लिए मिथिला भूमि पर प्रकट हुईं। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंची राज्य सभा सांसद डॉ महुआ माजी ने कहा कि माता जानकी आज भी प्रासंगिक और अनुकरणीय हैं।

उन्होंने कहा कि यदि आज की युवतियां माता जानकी के आदर्शों पर चलेंगी तो समाज बदल जाएगा। उन्होंने बंगला और मैथिली और संस्कृत भाषा में समानता का जिक्र करते हुए बताया कि महाकवि विद्यापति का छाप गुरु रविन्द्र नाथ टैगोर पर भी पड़ा है जो उनकी रचनाओं में साफ झलकता है। उन्होंने कहा कि जब जब राजनीति लड़खड़ाने लगती है तब तब साहित्यकार उन्हें थामने के लिए सामने आ जाते हैं।

इसके बाद कवि गोष्ठी शुरू हुई। गोष्ठी की शुरुआत अंजू झा ने नारी समर्पण के प्रति मूर्ति और कवि प्रणव प्रियदर्शी ने गांव और शहर की वास्तविक स्थिति को दर्शाया। पटना चेतना समिति के उमेश मिश्र ने मैथिली हो जन जन की भाषा पर कविता कविता झा ने आउ बैसू हमरा लग सुंदर कविता पाठ पाठ किया।

इसके अलावा जम्मू से पहुंचे राष्ट्रीय स्तर के कवि कमलेश भट्ट ने गजल सभी का प्यार पाना चाहती है मैं हिन्दू, हूं मैं मुस्लिम हूं की प्रस्तुती देकर सभी का दिल जीत लिया।

साथ ही संस्था के अध्यक्ष सिया राम झा सरस ने सरस गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को झूमने पर विवश कर दिया।

कार्यक्रम में 11और 12 अप्रैल को हरमू मैदान में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak