आदिवासी समाज की पहचान उसकी समृद्ध भाषा, संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली से : सांसद
दुमका।, 09 अगस्त (हि.स.)। झारखंड आदिवासी महोत्सव का उदघाटन मुख्य अतिथि सांसद नलिन सोरेन सहित उपस्थित अतिथियों ने रविवार को दीप प्रज्वलित कर कन्वेंशन सेंटर में किया।
कार्यक्रम में आदिवासी समाज की समृद्ध परंपरा, भाषा, साहित्य, कला, संस्कृति एवं विरासत को संरक्षित एवं संवर्धित करने पर विशेष जोर दिया गया। महोत्सव के माध्यम से आदिवासी संस्कृति की विविधता और समृद्ध विरासत को आम लोगों तक पहुंचाने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सांसद नलिन सोरेन ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी समृद्ध भाषा, संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली से है। हमें अपनी संस्कृति को हमेशा ध्यान में रखना होगा और आने वाली पीढ़ी को भी अपनी भाषा एवं संस्कृति से जोड़कर रखना होगा। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि हमारे बच्चे अपनी मातृभाषा, लोक परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत को समझें तथा उसे आगे बढ़ाने का कार्य करें। उन्होंने कहा कि आदिवासी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति को हमेशा याद रखना है, क्योंकि यही हमारी पहचान है।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी भाषा और संस्कृति को सीखें, अपनी परंपराओं को समझें और उन्हें आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। इस अवसर पर डीसी अभिजीत सिन्हा ने विश्व आदिवासी दिवस एवं झारखंड आदिवासी महोत्सव के अवसर पर सभी जिलेवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह दिन आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपरा, भाषा, कला, जीवनशैली और गौरवशाली विरासत को याद करने तथा उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का अवसर है।
विश्व आदिवासी दिवस का उद्देश्य आदिवासी समुदाय की विशिष्ट पहचान, संस्कृति और अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ उनकी समृद्ध विरासत को संरक्षित एवं संवर्धित करना है। जरमुंडी विधायक देवेंद्र कुंवर ने विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी समृद्ध संस्कृति, परंपरा, भाषा और प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली में निहित है। हमारी माटी, हमारी संस्कृति और हमारी परंपराएं हमारी अमूल्य विरासत हैं। इन्हें संरक्षित रखते हुए आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज ने अपनी विशिष्ट परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों के माध्यम से समाज को समृद्ध किया है। आज आवश्यकता है कि शिक्षा और विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती से आगे बढ़ाया जाए। महोत्सव के दौरान छात्र-छात्राओं एवं स्थानीय कलाकारों ने पारंपरिक गीत, संगीत और नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने झारखंड की समृद्ध आदिवासी विरासत की जीवंत झलक प्रस्तुत की और कार्यक्रम स्थल का माहौल उत्साह एवं उल्लास से भर दिया। इस अवसर पर कई लोगों में परिसम्पत्तियों का वितरण भी किया गया। आदिवासी कला, संस्कृति, परंपरा एवं प्रतिभा का भव्य प्रदर्शन देखने को मिला।
कार्यक्रम में विभिन्न कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों की छात्राओं सहित कलाकारों द्वारा आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। कार्यक्रम के दौरान कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, जामा एवं दुमका की छात्राओं द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुति, ट्राइबल फैशन शो, कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, जरमुंडी की प्रस्तुति, हूल वीर बाजल सोरेन पर आधारित लघु नाटक, कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, काठीकुंड एवं मसलिया की छात्राओं की प्रस्तुतियों सहित थॉमस टुडू एंड ग्रुप बैंड ने शानदार प्रस्तुति दी। ।वहीं विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए हुए सम्मानित कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान एवं उपलब्धि हासिल करने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / नीरज कुमार