जनजातीय शिल्पकार पंजीकरण मेला में 55 शिल्पकारों ने प्रदर्शित किए पारंपरिक उत्पाद
दुमका, 11 सितंबर (हि.स.)। जनजातीय शिल्पकारों की पहचान, पंजीकरण और उनके पारंपरिक कौशल एवं उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ, जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से शुक्रवार को इंडोर स्टेडियम, दुमका में जनजातीय शिल्पकार पंजीकरण मेला का आयोजन किया गया।
मेले का उद्घाटन डीसी अभिजीत सिन्हा ने किया। इस अवसर पर उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने कहा कि मेला का आयोजन दुमका के जनजातीय शिल्पकारों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस कार्यक्रम के माध्यम से यहां के जनजातीय शिल्पकारों की ओर से तैयार किए जा रहे पारंपरिक उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और उन्हें बड़े बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से शिल्पकारों को संस्थागत सहयोग एवं बाजार से जुड़ने के अवसर मिलेंगे।
उपायुक्त ने कहा कि दुमका में स्थानीय जनजातीय शिल्पकारों की ओर से तैयार उत्पादों की बिक्री के लिए स्टोर खोलने की दिशा में भी योजना बनाई जा रही है, ताकि जिले के स्थानीय उत्पादों को एक बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने कहा कि हाल ही में दुमका के चार उत्पादों को जीई टैग मिलना जिले के लिए गौरव और खुशी की बात है। जिला प्रशासन का प्रयास है कि दुमका की विशिष्ट कला, शिल्प और स्थानीय उत्पादों को अधिक से अधिक पहचान मिले और शिल्पकारों को इसका सीधा लाभ प्राप्त हो। उन्होंने कहा कि तसर के क्षेत्र में भी विभिन्न स्तरों पर कार्य किए जा रहे हैं, ताकि इससे जुड़े उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जा सके। इसके साथ ही डोकरा आर्ट और जादोपटिया चित्रकला जैसे पारंपरिक शिल्प को आगे बढ़ाने और इनके लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि दुमका में जल्द ही क्लस्टर मार्ट का निर्माण किया जा रहा है, जहां स्थानीय शिल्पकारों एवं उत्पादकों द्वारा तैयार उत्पादों की बिक्री के लिए उचित स्थान उपलब्ध कराया जाएगा।
55 जनजातीय शिल्पकारों ने किया पारंपरिक उत्पादों का प्रदर्शमेला में जिले के कुल 55 जनजातीय शिल्पकारों ने भाग लिया और अपने पारंपरिक हस्तशिल्प, हथकरघा एवं स्थानीय उत्पादों का प्रदर्शन किया। मेले के माध्यम से शिल्पकारों को अपनी कला एवं उत्पादों को प्रदर्शित करने के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों से बातचीत करने तथा पंजीकरण/एम्पैनलमेंट, बाजार संपर्क एवं उत्पादों के विपणन से संबंधित संभावनाओं एवं अवसरों की जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला।
मेले में शिल्पकारों द्वारा टसर सिल्क से निर्मित उत्पाद, बांस एवं केन के उत्पाद, जैविक एवं प्राकृतिक उत्पाद, जनजातीय जादोपटिया चित्रकला एवं कलाकृतियां, जूट से निर्मित उत्पाद, पारंपरिक धातु शिल्प, जनजातीय आभूषण एवं ज्वेलरी, हस्तनिर्मित फूल एवं सजावटी सामग्री, पारंपरिक खिलौने, हस्तनिर्मित वस्त्र एवं परिधान, उपहार सामग्री सहित विभिन्न प्रकार के जनजातीय उत्पाद प्रदर्शित किए गए। मेले में प्रदर्शित उत्पादों के माध्यम से दुमका जिले के जनजातीय शिल्पकारों के पारंपरिक ज्ञान, रचनात्मकता, कौशल एवं उद्यमशीलता की झलक देखने को मिली।
मेले में शिल्पकारों को टीआरआईएफईडी के माध्यम से पंजीकरण और एम्पैनलमेंट, बाजार संपर्क, उत्पादों की मार्केटिंग और विभिन्न अवसरों के संबंध में जानकारी दी गई। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से शिल्पकारों की भागीदारी रही, जिससे दुमका की समृद्ध जनजातीय कला, शिल्प एवं स्थानीय उत्पादों की विविधता सामने आई।
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हिन्दुस्थान समाचार / नीरज कुमार