सर्वोच्च न्यायालय की ओर से केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी करना स्वागतयाेग्य : एबीवीपी

 


रांची, 24 अगस्त (हि.स.)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने, झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 में कथित अनियमितताओं के मामले में सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार, झारखंड सरकार सहित अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने का स्वागत किया है।

इस संबंध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के झारखंड प्रदेश मंत्री प्रकाश टूटी ने सोमवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में अनियमितताओं और पारदर्शिता की मांग को लेकर अभाविप शुरू से ही विद्यार्थियों के साथ खड़ी रही है और उनके संघर्ष को अपना समर्थन देती रही है। सर्वोच्च न्यायालय में इस विषय पर सुनवाई होना विद्यार्थियों के संघर्ष को न्यायिक मंच मिलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितता के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर हो जिम्मेदारी तय

उन्होंने कहा कि पूर्व में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं को लेकर झारखंड सरकार की ओर से लिए गए निर्णयों ने चयनित और अनियमितताओं से प्रभावित विद्यार्थियों के बीच टकराव की स्थिति पैदा की है। सरकार की ओर से जानबूझकर ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न करना, जिनमें एक वर्ग के विद्यार्थियों को दूसरे वर्ग के विद्यार्थियों के सामने खड़ा होना पड़े, विद्यार्थियों के साथ छल के समान है। सरकार को विद्यार्थियों को आपस में खड़ा करने के बजाय सभी पक्षों से संवाद कर न्यायसंगत समाधान निकालना चाहिए था। परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितता या लापरवाही के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय हो और ईमानदारी से चयनित विद्यार्थियों के हितों की भी रक्षा सुनिश्चित की जाए।

टूटी ने कहा कि अभाविप शुरू से ही जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर आंदोलित विद्यार्थियों की मांग के साथ खड़ी रही है।

अभाविप का स्पष्ट मत रहा है कि इस पूरे प्रकरण से विद्यार्थियों के बीच उत्पन्न अविश्वास को समाप्त करने और वास्तविक तथ्यों को सामने लाने के लिए सीबीआई जांच जरूरी है। राज्य सरकार ने विद्यार्थियों के बीच संवाद और विश्वास बहाली के बजाय परिस्थितियों को इस तरह आगे बढ़ाया कि विद्यार्थी ही एक-दूसरे के सामने खड़े हो गए।

यह विद्यार्थियों के साथ छल है और उनके भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार्य नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय का मामले में संज्ञान लिया जाना इसकी गंभीरता को दर्शाता है। व्यापक स्तर पर जांच और संभावित अन्य पहलुओं को देखते हुए सीबीआई इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए उपयुक्त संस्था है। अभाविप को उम्मीद है कि सरकार राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर विद्यार्थियों के भविष्य को प्राथमिकता देगी, इस मांग पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगी और परीक्षा व्यवस्था पर विद्यार्थियों का विश्वास बहाल करने की दिशा में ठोस कदम उठाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak