रैबीज से शून्य मौत का लक्ष्य 2030 तक, झारखंड में राज्य कार्ययोजना होगी लागू

 


रांची, 08 जुलाई (हि.स.)। झारखंड में वर्ष 2030 तक रैबीज से होने वाली मौतों को शून्य पर लाने के लक्ष्य निर्धारित करने काे लेकर बुधवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तत्वावधान में नामकुम स्थित आरसीएच कॉन्फ्रेंस हॉल में राज्य स्तरीय बैठक आयोजित की गई।

इस अवसर पर बैठक की अध्यक्षता करते हुए एनएचएम के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि राज्यभर में रैबीज से शून्य मौत किए जाने संबंधित लक्ष्य का निर्धारण 2030 तक तय किया गया है। झारखंड में इसके लिए व्यापक तौर पर राज्य कार्ययोजना लागू की जाएगी।

अभियान निदेशक ने सभी सरकारी अस्पतालों में एंटी-रैबीज वैक्सीन और इंजेक्शन की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी सिविल सर्जन को कम से कम तीन माह का बफर स्टॉक बनाए रखने और स्टॉक घटते ही समय पर नई आपूर्ति की प्रक्रिया शुरू करने को कहा, ताकि किसी भी मरीज को उपचार में परेशानी न हो।

राज्य कार्ययोजना का मसौदा जुलाई में तैयार कर अगस्त में अंतिम रूप दिया जाएगा और 28 सितंबर को विश्व रैबीज दिवस पर इसे औपचारिक रूप से लॉन्च किया जाएगा। साथ ही नागरिकों से भी अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की गई।

बैठक में कुत्तों के माध्यम से फैलने वाले रैबीज की रोकथाम के लिए राज्य कार्ययोजना तैयार करने और विभिन्न विभागों के समन्वय से अभियान चलाने पर चर्चा हुई।

बैठक में स्वास्थ्य, पशुपालन, नगर निगम, वन विभाग और पंचायती राज विभाग के अधिकारियों ने वन हेल्थ दृष्टिकोण अपनाते हुए आवारा कुत्तों के मानवीय नियंत्रण, शेल्टर होम की व्यवस्था और भोजन प्रबंधन सहित कई उपायों पर विचार-विमर्श किया। साथ ही रैबीज नियंत्रण के लिए जनजागरूकता और विभागीय समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया।

बैठक में राज्य रैबीज नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल पदाधिकारी डॉ बीरेंद्र कुमार सिंह, आईईसी के राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ राहुल किशोर सिंह, रांची नगर निगम, पशुपालन निदेशालय, रिम्स सहित वन विभाग के अधिकारी पदाधिकारी मौजूद थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar