अमित शाह से मिले सुदेश, कुडमी को एसटी का दर्जा देने का किया आग्रह

 


रांची, 11 सितंबर (हि.स.)। आजसू प्रमुख सुदेश महतो ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से की मुलाकात, कुड़मी को एसटी दर्जा देने का किया अनुरोध

आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष और सुदेश कुमार महतो ने शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर कुड़मी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जा देने का आग्रह किया।

साथ ही झारखंड से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण और ज्वलंत विषयों पर चर्चा की एवं आवश्यक पहल के लिए ज्ञापन सौंपा।

मुलाकात के दौरान सुदेश ने जेपीएससी और जेएसएससी की प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने इन मामलों की सीबीआई और ईडी से जांच कराने की मांग की।

ज्ञापन के अनुसार झारखंड की 39 परीक्षाएं जांच के दायरे में लाई गई हैं, जबकि 06 परीक्षाओं को राज्य सरकार की ओर से स्थगित किया गया है।

सुदेश ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता युवाओं के भविष्य से जुड़ा विषय है। इसलिए इन मामलों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच जरूरी है।

कुड़मी समुदाय को एसटी का दर्जा देने का आग्रह

सुदेश ने झारखंड के कुड़मी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की लंबे समय से चली आ रही मांग पर भी केंद्रीय गृह मंत्री का ध्यान आकृष्ट कराया और इसे पूरा करने का अनुरोध किया।

कुड़माली, कुड़ुख और मुंडारी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग

उन्होंने कहा कि इस समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिलने से उसके सांस्कृतिक, सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक विकास को नई दिशा मिल सकेगी।

उन्होंने झारखंड की विभिन्न स्थानीय भाषाओं, विशेषकर कुड़माली, कुड़ुख और मुंडारी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग भी रखी।

उन्होंने कहा कि भाषाएं किसी भी समाज की पहचान और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनके संरक्षण और संवर्धन से संबंधित समुदायों के सामाजिक एवं सांस्कृतिक विकास को मजबूती मिलेगी।

सुदेश ने खनिज प्रभावित क्षेत्रों के परिवारों के हित में झारखंड में मिनरल बीयरिंग लैंड सेस लगाने की मांग की। उन्होंने आग्रह किया कि इस राशि का उपयोग केवल खनन प्रभावित क्षेत्रों के परिवारों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए किया जाए और इसके उपयोग की निगरानी एवं कार्यों का निर्धारण भारत सरकार की ओर से किया जाए। साथ ही डीएमएफ (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन) फंड के उपयोग में कथित अनियमितताओं एवं घोटाले की जांच सीबीआई से कराने की मांग भी की।

उन्होंने कहा कि डीएमएफ की राशि का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों और वहां रहने वाले लोगों के हितों की पूर्ति करना है। ऐसे में इसके उपयोग में किसी भी प्रकार की अनियमितता की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

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हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak