महिला आरक्षण विधेयक का विरोध करने वाले राजनीतिक दल इतिहास बन कर रह जायेंगे : जदयू

 


रांची,18 अप्रैल (हि.स.)। जनता दल यूनाईटेड(जदयू) के प्रदेश प्रवक्ता सागर कुमार ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' विधेयक के विरोध में कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके एवं सपा के मतदान की निंदा करते हुए इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

उन्होंने शनिवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि लोकतंत्र एवं संसदीय इतिहास में यह काले अध्याय के तौर पर सामने आया है। उन्होंने कहा कि विधेयक को पारित कराने के लिए तीन दिवसीय विशेष सत्र आहूत कि गई एवं सभी राजनीतिक दलों से दलीय भावना से ऊपर उठ इसका समर्थन का आग्रह किया गया। सदन में बीस घण्टे से अधिक चर्चा के बावजूद विपक्ष ने विधेयक गिराने का काम किया। यह उनके महिला विरोधी मानसिकता का प्रतिबिंब है। विपक्ष ने देश की आधी आबादी के विकास,उन्नयन एवं सशक्तिकरण में बाधा पहुँचाने का कार्य किया है।

उन्होंने कहा की बिहार में नीतीश कुमार की सरकार ने महिलाओं को स्थानीय निकाय,पंचायती राज में पचास प्रतिशत आरक्षण देने का काम किया। साथ ही बिहार पुलिस एवं बिहार सरकार अंतर्गत नौकरियों में 35प्रतिशत आरक्षण दिया तब लालू प्रसाद ने इसे ग़ैर ज़रूरी बताया और इसका ख़ामियाजा वह स्वयं एवं उनकी पार्टी आज तक भुगत रही है,ठीक उसी तरह विधेयक का विरोध करने वाले राजनीतिक दल अपने राज्यों और देश में एक इतिहास बनकर रह जायेंगे। देश की सत्तर करोड़ महिलाएं आगामी चुनावों में इन दलों को मुंह दिखाने लायक़ नहीं छोड़ेगी।

परिसीमन पर कुमार ने कहा कि देश में आज़ादी के बाद अब तक पांच बार परिसीमन हुआ है, परिवार नियोजन को बढ़ावा देने एवं राज्यों के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए 2001 में संविधान संशोधन कर 2026 तक सीटों की संख्या फ़्रीज़ की गई थी, अब जब समय सीमा खत्म हो चुकी है तो पुनः परिसीमन होना है।

विपक्ष के लोग दक्षिण राज्यों के प्रतिनिधित्व कम होने और अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए आरक्षण घटने का भ्रम फ़ैला रहे, जबकि एनडीए की सरकार सभी राज्यों में पचास फ़ीसदी सीट बढ़ाकर व्यक्ति के प्रतिनिधित्व के अधिकार को सुरक्षित करना चाहती है, साथ ही क्षेत्रीय संतुलन भी बेहतर बनाने जा रही है। आश्चर्य है कि विपक्ष सीट बढ़ने से पूर्व ही स्वयं को पराजित समझ चुका है।---------------

हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे