अल्पसंख्यकों को वोट बैंक समझना बंद करे हेमंत सरकार : राफिया

 


रांची, 18 अक्टूबर (हि.स.)। भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज ने हेमंत सोरेन सरकार और झारखंड मुक्ति मोर्चा-कांग्रेस गठबंधन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि झारखंड में अल्पसंख्यक समाज के साथ सिर्फ वादों के साथ वोट बैंक की राजनीति हो रही है।

राफिया ने रविवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कब्रिस्तान की बाउंड्री कराना गलत नहीं है, लेकिन सवाल यह है कि मुर्दों की हिफाजत की चिंता करने वाली हेमंत सरकार और उनके मंत्री हाफिजुल अंसारी हैं, लेकिन जिंदा अल्पसंख्यक समाज के बच्चों और अल्पसंख्यक समुदाय की भविष्य की चिंता कब होगी। कब्रिस्तान की दीवारें खड़ी हो रही हैं, लेकिन उर्दू पढ़ने वाले बच्चों के अंधकार भरी ज़िंदगी और भविष्य के बीच की दीवारें कौन गिराएगा।

राफिया नाज़ ने कहा कि उर्दू शिक्षक बहाली की लंबित प्रक्रिया सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। उर्दू सहायक आचार्य के लगभग 7000 से अधिक पदों की स्वीकृति हुई थी। यदि इतने पद स्वीकृत होने के बावजूद नियुक्तियां लंबित हैं, तो इसका जवाब कौन देगा। क्या अल्पसंख्यक समाज के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मांगने का भी अधिकार नहीं है।

उन्होंने कहा कि मदरसा बोर्ड के गठन पर स्पष्टता नहीं है, गिने चुने जो उर्दू के शिक्षक भी हैं उनका वेतन लंबे समय से रुकी हुई है। अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम के पुनर्गठन और प्रभावी कार्यप्रणाली पर सवाल, युवाओं के रोजगार और शैक्षणिक संस्थानों की समस्याएं को आखिर इन मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही कहां है। अल्पसंख्यक समाज को भाषण नहीं, परिणाम चाहिए, आश्वासन नहीं, नियुक्तियां चाहिए, घोषणाएं नहीं, धरातल पर काम चाहिए।

राफिया नाज़ ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस को यह समझना होगा कि अल्पसंख्यक समाज केवल चुनाव के समय याद आने वाला वोट बैंक नहीं है। यदि सरकार वास्तव में हितैषी है, तो उर्दू शिक्षक बहाली की समयसीमा घोषित करे, मदरसा बोर्ड के गठन पर अपना रुख स्पष्ट करे और अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम की स्थिति पर श्वेतपत्र जारी करे।

उन्होंने हेमंत सोरेन सरकार को घेरते हुए कहा कि सत्ता में बैठकर समाज के हितैषी होने का दावा करना आसान है, लेकिन बच्चों को शिक्षा, युवाओं को रोजगार और जरूरतमंदों को आर्थिक अवसर देना असली कसौटी है।

सरकार याद रखे, दीवारें बनवाने से इतिहास नहीं बनता, आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बनाने से इतिहास बनता है। झारखंड के अल्पसंख्यक समाज को अब जवाब चाहिए और हेमंत सरकार को जवाब देना होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे