शरद पूर्णिमा : बनेंगे दुर्लभ संयोग, आसमान से होगी अमृत की वर्षा
चतरा, 24 अक्टूबर (हि.स.)। रविवार को शरद पूर्णिमा में आसमान से अमृत की वर्षा होगी। आश्विन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला शरद पूर्णिमा रविवार को मनाया जाएगा। इस बार शरद पर वर्षों बाद कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। पूर्णिमा तिथि, रेवती नक्षत्र के संयोग विशेष फलदायी होंगे। शरद पूर्णिमा अपने साथ कई शुभ संयोग के साथ-साथ शरद ऋतु का सौगात लेकर प्रकट होगा। शरद पूर्णिमा उत्सव के साथ ही दीपों का महापर्व दीपावली और छठ पूजा की तैयारियां प्रारंभ हो जाती है।
आचाार्य चेतन पांडे ने बताया कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा से अमृत की वर्षा होती है। इस दिन चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होती है। द्वापर युग में शरद पूर्णिमा की रात ही भगवान श्री कृष्ण गोकुल में 1008 गोपियों के साथ रासलीला किया था। तब भगवान की रासलीला को देखने देवी देवताओं के साथ चंद्रमा भी पृथ्वी के निकट पहुंचा था और अपने अमृत वर्षा से जन-जन को तृप्त किया था। लोग शरद पूर्णिमा की रात खीर बनाकर अपने छतों पर खुले आसमान में रखते हैं।
खीर का महाप्रसाद रात भर खुले आसमान में रहने के बाद अगले सुबह उसका सेवन किया जाता है। मान्यता है कि रात भर खीर खुले आसमान में रहने से इस रात हुए अमृत की वर्षा से खीर में कई औषधीय गुण बरसते हैं जो पीत रोग से छुटकारा दिलाता है और स्वस्थ जीवन का निर्माण करता है। शरद पूर्णिमा के साथ दिवाली की तैयारियां शुरू हो जाएगी। शरद पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी की भी पूजा होती है। ऐसी मान्यता है कि माता लक्ष्मी रात्रि में विचरण करती है और भक्तों पर धन-धान्य से पूर्ण करती है। इस दिन रात भर जाग कर मां लक्ष्मी के भजन करना चाहिए।
कहते हैं मां लक्ष्मी इस दिन रात में जगने और उनकी अराधना करने वालों को धन और वैभव का आशीर्वाद देती हैं। इसलिए इसे कोजागिरी पूर्णिमा भी कहते हैं। शरद पूर्णिमा पर कुंडली में कमजोर चंद्रमा वाले जातक उपाय करते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / जितेन्द्र तिवारी