आदिम जनजातियों के घर पहुंची योजना, आयुक्त ने किया 'प्रोजेक्ट समर्थ' योजना की शुरूआत
रामगढ़, 06 अक्टूबर (हि.स.)। झारखंड में आदिम जनजाति और अनुसूचित जाति का उत्थान करने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। रामगढ़ जिले में विशेष रूप से संवेदनशील जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) एवं अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय के सामाजिक-आर्थिक उत्थान तथा उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने के उद्देश्य से 'प्रोजेक्ट समर्थ' की शुरुआत की गई है।
हजारीबाग आयुक्त विजय कुमार ने रामगढ़ जिले में इसकी शुरुआत की। मंगलवार को कल्याण विभाग द्वारा से रामगढ़ प्रखंड अंतर्गत दोहाकातू पंचायत एवं मांडू प्रखंड के मुरपा (कुज्जू पूर्वी) पंचायत में पीवीटीजी तथा एसटी परिवारों के लिए एक विशेष शिविर का आयोजन किया गया।
राज्य सरकार के निर्देश पर प्रोजेक्ट समर्थ रामगढ़ जिले से प्रारंभ किया गया। आयुक्त विजय कुमार ने कहा कि इसका मूल ध्येय अंतिम पायदान पर खड़े विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) तथा अनुसूचित जनजाति (एसटी) परिवारों को बुनियादी सुविधाओं जैसे पक्का आवास, शुद्ध पेयजल, स्वास्थ्य-पोषण, शिक्षा, निर्बाध बिजली, पक्की सड़क, सामाजिक सुरक्षा पेंशन एवं राशन से पूर्णतः आच्छादित कर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।
जिला अंतर्गत 34 चयनित गांवों में प्रशासनिक टीमों द्वारा गहन डोर-टू-डोर सत्यापन कर प्रत्येक परिवार की जमीनी समस्याओं की पहचान की गई। रामगढ़ प्रखंड के दोहाकातु पंचायत एवं मांडू प्रखंड की गोलापतरा पंचायत से प्रखंड स्तरीय शिविरों का औपचारिक आगाज कर सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ सीधे लाभुकों के द्वार तक पहुंचाया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के आयुक्त विजय कुमार, विधायक ममता देवी, डीसी ऋतुराज, डीडीसी आशीष अग्रवाल का बुके एवं शॉल देकर सम्मानित किया गया। शिविर के दौरान कई योग्य लाभुकों के बीच जॉब कार्ड, दिव्यांगजनों के लिए ट्राइसाइकिल एवं अन्य विकास योजनाओं से जुड़ी परिसंपत्तियों का वितरण किया गया।
मौके पर विधायक ममता देवी ने कहा कि राज्य सरकार के दिशा निर्देश में रामगढ़ जिले में आदिम जनजाति एवं अनुसूचित जनजाति परिवारों की बेहतरी और सर्वांगीण विकास के लिए 'प्रोजेक्ट समर्थ' एक अनोखी पहल है। हमारे समाज के ये सबसे पिछड़े वर्ग सालों से मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्षरत रहे हैं। लेकिन इस तरह की जमीनी योजनाओं से उन्हें सीधा लाभ मिलेगा।
डीसी ऋतुराज ने कहा कि 'प्रोजेक्ट समर्थ' केवल एक योजना नहीं, बल्कि हमारे जिले के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े आदिम जनजाति एवं अनुसूचित जनजाति परिवारों के जीवन में स्थायी और सकारात्मक बदलाव लाने का एक संकल्पबद्ध प्रयास है। जिला प्रशासन प्रत्येक परिवार के डोर-टू-डोर सर्वे के माध्यम से उनकी वास्तविक समस्याओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, आवास तथा आजीविका संबंधी प्राथमिकताओं को चिन्हित कर रहा है।
हमारा स्पष्ट उद्देश्य है कि राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि उसका प्रत्यक्ष असर धरातल पर दिखाई दे।
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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश