कील की सेज पर रूपा देवी की साधना, उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

 




12 वर्षों से लगातार कर रहीं मां दुर्गा की साधना

रामगढ़, 12 अक्टूबर (हि.स.)।

नवरात्रि के पावन अवसर पर मां दुर्गा की भक्ति और आस्था का अनूठा नजारा रामगढ़ जिले के बरकाकाना क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। पोचरा स्थित झोपड़ी टोला की रहने वाली रूपा देवी अपनी कठिन साधना और अटूट श्रद्धा को लेकर इन दिनों चर्चा में हैं। नवरात्रि के दौरान रूपा देवी लोहे की नुकीली कील से बनी सेज पर लेटकर अपने पेट पर कलश धारण करती हैं और मां दुर्गा की आराधना में लीन रहती हैं। सोमवार को उनकी इस साधना को देखने के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालुओं का पहुंचना जारी है।

स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच रूपा देवी की साधना को लेकर गहरी आस्था है। भक्तों का मानना है कि मां दुर्गा अपने भक्तों की प्रार्थनाएं सुनती हैं और सच्चे मन से मांगी गई मुरादें पूरी करती हैं। इसी विश्वास के साथ लोग रूपा देवी के दर्शन करने और माता रानी का आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं। हालांकि, मनोकामना पूरी होने से जुड़ी मान्यताएं श्रद्धालुओं की आस्था पर आधारित हैं।

रूपा देवी के पति राजेश राम ने बताया कि पिछले 12 वर्षों से वह लगातार मां दुर्गा की आराधना कर रही हैं। पिछले तीन वर्षों से वह नवरात्रि के दौरान लोहे की नुकीली कीलों से बनी सेज पर आसन ग्रहण कर कठिन साधना कर रही हैं। उनकी इस अनूठी साधना को देखने के लिए प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है।

रूपा देवी की सास बंदनी देवी ने बताया कि इस धार्मिक आयोजन की चर्चा झारखंड तक सीमित नहीं है। बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और ओडिशा सहित पांच राज्यों से श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। भक्त माता रानी के जयकारे लगाते हुए पूजा-अर्चना में शामिल हो रहे हैं। पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।

नवरात्रि के दौरान रूपा देवी की साधना लोगों के बीच चर्चा और आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन जहां आस्था और विश्वास का प्रतीक है, वहीं रूपा देवी की वर्षों से चली आ रही आराधना उनकी धार्मिक निष्ठा को दर्शाती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश