हुल दिवस पर रांची विश्वविद्यालय में वीर शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि

 


रांची, 30 जून (हि.स.)। रांची विश्वविद्यालय मुख्यालय में मंगलवार को हुल दिवस श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। कुलपति सभागार में आयोजित कार्यक्रम में हुल क्रांति के महानायक सिदो, कान्हो, चांद, भैरव तथा वीरांगनाओं फूलो और झानो को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने हुल क्रांति के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए नई पीढ़ी से इन महान स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

कार्यक्रम की शुरुआत वीर क्रांतिकारियों के चित्रों पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। उपस्थित अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने दो मिनट का मौन रखकर हुल क्रांति के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

रांची विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने अपने संदेश में कहा कि हुल दिवस केवल एक ऐतिहासिक अवसर नहीं, बल्कि अपने गौरवशाली अतीत और स्वतंत्रता संग्राम के उन महान नायकों को स्मरण करने का दिन है, जिन्होंने जल, जंगल और जमीन की रक्षा तथा अन्याय के खिलाफ संघर्ष का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि सिदो-कान्हो सहित सभी वीर सेनानियों का योगदान सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। झारखंड को शिक्षा, संस्कृति, सामाजिक विकास और अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ाना ही इन महान विभूतियों के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

कुलसचिव डॉ. राजकुमार शर्मा ने कहा कि झारखंड सदैव वीर क्रांतिकारियों की धरती रहा है। वर्ष 1855 में सिदो, कान्हो, चांद और भैरव ने अंग्रेजों की शोषणकारी जमींदारी व्यवस्था और अत्याचारों के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका था। यह ऐतिहासिक आंदोलन हुल क्रांति अथवा संथाल विद्रोह के नाम से जाना जाता है, जिसने देश के स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी।

उन्होंने कहा कि हुल क्रांति केवल अंग्रेजी शासन के विरोध का आंदोलन नहीं थी, बल्कि यह आदिवासी समाज के स्वाभिमान, अधिकारों तथा जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए लड़ी गई ऐतिहासिक लड़ाई थी। आज भी इसके आदर्श समाज को न्याय, समानता और आत्मसम्मान का संदेश देते हैं।

गौरतलब है कि वर्ष 1855 में सिदो, कान्हो, चांद और भैरव के नेतृत्व में संथाल समुदाय ने अंग्रेजी शासन, जमींदारी प्रथा तथा अत्याचारों के खिलाफ ऐतिहासिक विद्रोह किया था। यह आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रारंभिक और महत्वपूर्ण जनआंदोलनों में गिना जाता है।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के सीसीडीसी डॉ. पी.के. झा, वित्त पदाधिकारी (एफओ) डॉ. दिलीप प्रसाद, प्रोक्टर डॉ. मुकुंद मेहता, साइंस डीन डॉ. वंदना कुमारी, विभिन्न संकायों के डीन, विभागाध्यक्ष, वरीय पदाधिकारी तथा विश्वविद्यालय के बड़ी संख्या में शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।-----------

हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak