रांची विवि के कॉलेजों से अब पीजी की पढाई होगी खत्म, छात्रों को मिलेंगी अब बारकोड युक्त डिग्रियां

 


रांची, 17 जून (हि.स.)। रांची विश्वविद्यालय के अधीन आनेवालों कॉलेजों से अब पीजी की पढाई खत्म होगी। पीजी करनेवाले छात्रों को अब विश्वविद्यालय से इसकी शिक्षा मिल पाएगी।

साथ ही विश्वविद्यालय के छात्रों को मिलनेवाली डिग्रियां अब बारकोड युक्त होंगी। यह निर्णय बुधवार को

रांची विश्वविद्यालय के अकादमिक काउंसिल की बैठक में लिया गया।

विश्विविद्यालय के मास कॉम सभागार में हुई बैठक की अध्यक्षता कुलपति प्रो सरोज शर्मा ने किया। बैठक में अकादमिक काउंसिल के सभी सदस्य शामिल हुये। कुलपति प्रो सरोज शर्मा की अध्यक्षता में अकादमिक काउंसिल की यह पहली बैठक थी जिसमें 37 महत्वयपूर्ण विषयों और प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई।

बैठक में कुलपति प्रो शर्मा ने सभी सदस्यों से कहा कि यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वतयन का समय है। साथ ही हमें समय के साथ एआइ, भारतीय ज्ञान परंपरा मूक्सय जैसे विषयों पर ध्यांन देना है। बैठक में कई एजेंडों पर चर्चा हुई।

बैठक में लिये गये निर्णय

- रांची विश्वुविद्यालय में एमए और एमएससी इन स्टैएटिस्टिक्सइ की पढाई शुरू होगी।

- विश्वविद्यालय के पीजी मैथमेटिक्स विभाग में एमएससी डाटा साईंस की पढाई शुरू होगी।

- विश्वविद्यालय में एमए इन एजुकेशन की पढाई जल्द ही शुरू होगी।

- मैनेजमेंट स्ट डीज, योग , परफॉर्मिंग एंड फाइन आर्ट, लीगल स्टाडीज के नाम बदलने का प्रस्ताव पास किया गया। अब इन सभी विभागों के नाम में स्कूेल जोड़ा जायेगा।

- एमबीए के छात्रों के पीएचडी करने पर उनकी डिग्री पर ‘डॉक्टतर ऑफ फिलोसोफी इन मैनेजमेंट’ लिखा जायेगा।

- सेंटर फोर आईकेएस शुरू करने पर सहमति दी गयी।

- बैठक में छात्रों को दिये जाने वाले डिग्री में यूजीसी के नियमों के तहत विषय और संकाय का नाम प्रिंट करने की बात कही गयी। ताकि यहां से पास छात्रों को बाहर किसी प्रकार की परेशानी न हो।

- पीजी आरयू केमिस्ट्री विभाग में छह महिने का पीएचडी कोस पाठ्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताडव पास किया गया। पीएचडी कोर्स वर्क को पूरे विश्व विद्यालय में यूनिफार्म बनाने का निर्णय लिया गया।

- पीएफए विभाग में चार नये यूजी कोर्स शुरू करने पर सहमति बनी।

- बैठक में निर्णय लिया गया कि कोई भी सर्टिफिकेट कोर्स एक वर्ष से कम का नहीं होगा। किसी भी स्किल्डग बेस्डक कोर्स में 10 से कम छात्र होने पर उसे बंद करने पर विचार किया जायेगा।

मौके पर कुलपति ने कहा कि जिन विभागों में छात्रों की संख्या कम है वहां हम सभी प्रयास करें ताकि वहां छात्र नामांकन लें। उन्होंने कहा कि रांची विश्विविद्यालय की परंपरा बहुत समृद्ध है और हमें अब यूजीसी और झारखंड सरकार के वैधानिक नियमों के अनुसार ही तेजी से कार्य करना है। उन्होंने प्लेसमेंट के लिये जॉब मेला आयोजित करने की बात कही।

इस दौरान आइक्यूपएसी के प्रस्ताव जिसमें प्रवासी भारतीयों के लिये ‘डायस्पो रा स्टाडीज’ केंद्र को स्थापित करने पर कुलपति ने कहा कि विदेशों में बहुत बड़ी तादाद ऐसे प्रवासी भारतीयों की है जो झारखंड बिहार की भाषा सर्टिफिकेट कोर्स के माध्यडम से सीखना चाहते हैं। इसके अलावा उन्हें अपनी जड़ों से जुड़ने के लिए यह संस्थान विभिन्न अकादमिक गतिविधियों का केंद्र रहेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak