झारखंड सरकार की शोध परियोजनाओं में रांची विवि को उल्लेखनीय सफलता, मिली 26.45 लाख की राशि
रांची, 21 अगस्त (हि.स.)। झारखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार परिषद् (जेसीएसटीआई), उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश के अंतर्गत राज्य के विभिन्न शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों की कुल 45 शोध परियोजनाओं के लिए स्वीकृत दी गई है।
इस उपलब्धि में रांची विश्वविद्यालय ने उल्लेखनीय स्थान अर्जित किया है। विश्वविद्यालय से संबद्ध शोधकर्ताओं की चार शोध परियोजनाओं को कुल 26.45 लाख रुपये की स्वीकृति प्राप्त हुई है। तकनीकी एवं इंजीनियरिंग संस्थानों को छोड़कर राज्य के सामान्य विश्वविद्यालयों में स्वीकृत परियोजनाओं की तुलना में यह सर्वाधिक स्वीकृत राशि है। यह उपलब्धि रांची विश्वविद्यालय में शोध, नवाचार और अंतर्विषयी अनुसंधान की बढ़ती संस्कृति का प्रमाण है।
रांची विवि से संबद्ध स्वीकृत शोध परियोजनाएं
1. डॉ स्मृति सिंह, विश्वविद्यालय रसायन शास्त्र विभाग, रांची विश्वविद्यालय — सह-अन्वेषक
मुख्य अन्वेषक: शिवनंदन राम, रसायन शास्त्र, मारवाड़ी कॉलेज, रांची
विषय: झारखंड में खनन प्रभावित जल से भारी धातु निष्कासन के लिए इंजीनियर्ड नैनोकंपोजिट/सामग्री का विकास।
2. डॉ नीरज, विश्वविद्यालय रसायन शास्त्र विभाग, रांची विश्वविद्यालय — सह-अन्वेषक
मुख्य अन्वेषक: डॉ तितास कुमार मुखोपाध्याय, रसायन शास्त्र, एनआईटी जमशेदपुर
विषय: मुख कैंसर के प्रोटीन लक्ष्यों का इन-सिलिको अध्ययन एवं झारखंड में सुरक्षित लक्षित कीमोथेरेपी के लिए न्यून-आयामी नैनोकैरियर की डिजाइन रणनीति।
3. डॉ आनंद कुमार ठाकुर, जंतु विज्ञान विभाग, रांची विश्वविद्यालय — मुख्य अन्वेषक
विषय: झारखंड के रांची पठार के कृषि-पारिस्थितिकी तंत्र में मकरंद-भक्षी निशाचर परागणकर्ता कीटों की विविधता, पारिस्थितिक नेटवर्क, कार्यात्मक भूमिका एवं आंत्र माइक्रोबायोटा पर अध्ययन।
4. डॉ रोहित श्रीवास्तव, जंतु विज्ञान विभाग, रांची विश्वविद्यालय — सह-अन्वेषक
मुख्य अन्वेषक डॉ रविंदर पाल सिंह, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कंप्यूटर इंजीनियरिंग, एनआईएएमटी, रांची
विषय: ऑर्थोपेडिक अनुप्रयोगों के लिए एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग की ओर से ग्राफीन आधारित बायोरिसॉर्बेबल कंपोजिट स्कैफोल्ड का निर्माण एवं प्रायोगिक अध्ययन शामिल है।
इसे लेकर कुलपति प्रो सरोज शर्मा ने शुक्रवार काे शाेधकर्ताओं को दी बधाई देते हुए कहा कि शोध ही विश्वविद्यालय की अकादमिक पहचान को नई ऊंचाई देता है। उन्होंने इस उपलब्धि पर सभी परियोजना-अन्वेषकों और शोध टीमों को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के शिक्षकों की ओर से प्रतिस्पर्धी शोध परियोजनाओं के लिए सफलतापूर्वक प्रस्ताव प्रस्तुत करना विश्वविद्यालय में विकसित हो रही शोध एवं नवाचार की सशक्त संस्कृति का परिचायक है।
उन्होंने शोधकर्ताओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि यह उपलब्धि एक शुरुआत है और विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धी शोध परियोजनाओं के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि परियोजना अप्रैजल समिति (पीएसी) की 04 एवं 05 जून 2026 को संपन्न बैठकों की अनुशंसा के आलोक में उक्त सभी परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak