प्राचार्य और शिक्षक स्कूलों में चलाएं नशे के खिलाफ जागरूकता गतिविधियां : डीईओ
रांची, 12 जून (हि.स.)। झारखंड शिक्षा परियोजना (जेईपीसी), रांची के तत्वावधान में शुक्रवार को निषिद्ध मादक पदार्थों की रोकथाम और जागरूकता विषय पर जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन अमर शहीद ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव जिला मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय में किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यालयों में नशा मुक्ति के प्रति जागरूकता बढ़ाना, विद्यार्थियों को मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों से अवगत कराना और नशा मुक्त समाज के निर्माण में विद्यालयों की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करना था।
कार्यक्रम में जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ), रांची, जिला शिक्षा अधीक्षक, सिविल सर्जन के अलावा जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी, झारखंड शिक्षा परियोजना के परियोजना कर्मी और जिले के सभी सरकारी उच्च विद्यालयों से एक-एक प्राचार्य सहित अन्य ने भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
इस अवसर पर जिला शिक्षा पदाधिकारी ने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व निर्माण का भी माध्यम हैं। उन्होंने सभी शिक्षकों और प्राचार्यों से विद्यालय स्तर पर नियमित जागरूकता गतिविधियां चलाने और विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
विद्यालयों को नशा मुक्ति अभियान का बनाया जाए प्रभावी केंद्र : डीएसई
जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई), रांची ने विद्यार्थियों में सकारात्मक सोच, अनुशासन और जीवन मूल्यों के विकास पर बल देते हुए कहा कि विद्यालयों को नशा मुक्ति अभियान का प्रभावी केंद्र बनाया जाना चाहिए।
सिविल सर्जन ने मादक पदार्थों के सेवन से होने वाले शारीरिक, मानसिक और सामाजिक दुष्प्रभावों की जानकारी दी और समय रहते पहचान एवं परामर्श की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
वहीं अतिरिक्त जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने विद्यालयों में जागरूकता अभियान, शपथ ग्रहण, रैली, पोस्टर प्रतियोगिता, परिचर्चा सहित अन्य गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने का आग्रह किया।
प्रशिक्षण के दौरान जिले के विभिन्न सरकारी उच्च विद्यालयों के प्राचार्यों ने भी अपने अनुभव साझा किए और विद्यालय स्तर पर नशा मुक्ति अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए सुझाव दिया।
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने मादक पदार्थों के प्रकार, उनके दुष्प्रभाव, रोकथाम के उपाय, विद्यार्थियों की पहचान और समय पर परामर्श से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए इसे विद्यालयों में प्रभावी रूप से लागू करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में सभी प्रतिभागियों ने नशा मुक्त विद्यालय और नशा मुक्त समाज के निर्माण के लिए सक्रिय योगदान देने एवं विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति सतत जागरूक करने की सामूहिक शपथ ली।
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हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak