झारखंड की 11.7 प्रतिशत किशोरियां गर्भवती, 29.2 प्रतिशत महिलाओं का वजन बेहद कम
रांची, 09 सितंबर (हि.स.)।
झारखंड में करीब हर तीन में से एक महिला 29.2 प्रतिशत बेहद कम वजन की है, जबकि 16.9 प्रतिशत महिलाएं अधिक वजन और मेटाबॉलिक जोखिमों का सामना कर रही हैं। 20-24 वर्ष की 28 प्रतिशत महिलाओं का विवाह 18 वर्ष की उम्र से पहले हुआ, वहीं 11.7 प्रतिशत किशोरियां गर्भवती हैं या फिर मां बन चुकी हैं।
यह चिंताजनक आंकड़े बुधवार को झारखंड सरकार और चाइल्ड इन नीड इंस्टीट्यूट (सिनी) के संयुक्त सहयोग से रांची में आयोजित प्री कंसेप्शन केयर पर राज्यस्तरीय परामर्श बैठक में जारी किए गए। विशेषज्ञों ने इसे स्वास्थ्य, पोषण, परिवार नियोजन, शिक्षा और बाल संरक्षण कार्यक्रमों से जोड़कर राज्यस्तरीय दिशानिर्देश तैयार करने पर जोर दिया।
बैठक में विशेषज्ञों ने गर्भावस्था के साथ-साथ गर्भधारण से पहले की स्वास्थ्य देखभाल को स्वास्थ्य व्यवस्था का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि स्वस्थ मां और स्वस्थ बच्चे की नींव गर्भावस्था के दौरान नहीं, बल्कि उससे पहले रखी जाती है।
किशोरावस्था से ही पोषण, एनीमिया की रोकथाम, मानसिक एवं प्रजनन स्वास्थ्य और स्वस्थ जीवनशैली पर ध्यान देना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।
एनएचएम झारखंड के मिशन निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि केवल जागरूकता पर्याप्त नहीं है। समय पर स्क्रीनिंग, उचित उपचार, निरंतर परामर्श और फॉलोअप जरूरी है।
सिनी के चीफ ऑफ प्रोग्राम्स मेघेंद्र बनर्जी ने कहा कि बेहतर गर्भावस्था परिणामों के लिए प्री कंसेप्शन केयर को लेकर जमीनी स्तर पर स्पष्ट दिशा-निर्देश और कार्यान्वयन व्यवस्था की जरूरत है।
बैठक में सिटी के समुदाय आधारित मॉडल, शोध साक्ष्य और झारखंड के अनुभव साझा किए गए।
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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar