जनवरी से जुलाई तक झारखंड पुलिस ने नक्सलियों से लेकर साइबर अपराधियों पर कसा शिकंजा

 


रांची, 24 अगस्त (हि.स.)। झारखंड पुलिस मुख्यालय ने जनवरी से जुलाई 2026 तक राज्य में अपराध नियंत्रण, नक्सलवाद, साइबर अपराध, संगठित अपराध और मादक पदार्थों के खिलाफ की गई कार्रवाई का विस्तृत आंकड़ा जारी किया है। पुलिस मुख्यालय की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों में नक्सल विरोधी अभियानों में सफलता, साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी, हथियार और मादक पदार्थों की बरामदगी, साइबर ठगी की रकम फ्रीज कराने, चोरी या गुम हुए मोबाइल की बरामदगी के साथ-साथ पुलिस आधुनिकीकरण और पुलिसकर्मियों के कल्याण से जुड़ी उपलब्धियों का भी उल्लेख किया गया है।

पुलिस मुख्यालय के अनुसार जनवरी से 15 अगस्त 2026 तक राज्य में कुल 113 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें 49 माओवादी, 30 पीएलएफआई, 23 टीएसपीसी, 10 जेजेएमपी और एक एसजेएमएम का सदस्य शामिल है। इसी अवधि में 50 नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया। नक्सल विरोधी अभियानों के दौरान सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ों में 22 माओवादी मारे गए। पुलिस ने नक्सलियों के खिलाफ अभियान के दौरान 111 हथियार और 9,904 जिंदा कारतूस बरामद करने की जानकारी दी है।

पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार चलाए जा रहे अभियानों का उद्देश्य नक्सली संगठनों की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के साथ उनके हथियार और संगठनात्मक नेटवर्क को कमजोर करना है।

साइबर अपराध के 658 मामले दर्ज, 486 गिरफ्तार

साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई में भी पुलिस ने बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां की हैं। जनवरी से जून 2026 तक साइबर अपराध से जुड़े 658 मामले दर्ज किए गए, जबकि 486 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान पुलिस ने साइबर अपराधियों के पास से 651 मोबाइल फोन, 679 सिम कार्ड और 74 एटीएम कार्ड सहित अन्य सामान बरामद किया।

साइबर अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए पुलिस द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे प्रतिबिंब ऐप के माध्यम से जनवरी से जुलाई तक 121 मामलों में 336 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान 545 मोबाइल फोन और 655 सिम कार्ड भी बरामद किए गए।

डायल-1930 पर 77,503 शिकायतें, 150 करोड़ रुपये फ्रीज

साइबर ठगी के मामलों में त्वरित कार्रवाई के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) और डायल-1930 व्यवस्था का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया। जनवरी से जुलाई 2026 तक डायल-1930 पर 77,503 शिकायतें प्राप्त हुईं। पुलिस के अनुसार साइबर ठगी से जुड़ी रकम में से करीब 150 करोड़ रुपये बैंक खातों में फ्रीज कराए गए, जबकि 19 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस दिलाए गए।

इसी अवधि में साइबर अपराध पर नियंत्रण के लिए 22,165 मोबाइल नंबर और 10,054 आईएमईआई नंबर ब्लॉक किए गए। पुलिस का कहना है कि साइबर ठगी की शिकायत मिलने के बाद रकम को तत्काल फ्रीज कराने और संदिग्ध मोबाइल नंबरों को ब्लॉक करने से पीड़ितों को राहत पहुंचाने में मदद मिल रही है।

संगठित अपराध के खिलाफ 193 गिरफ्तार

संगठित अपराध के खिलाफ चलाए गए अभियान में जनवरी से जुलाई तक 193 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार अपराधियों के पास से 63 हथियार और 274 जिंदा कारतूस बरामद की गईं।

पुलिस ने 50 अपराधियों के खिलाफ क्राइम कंट्रोल एक्ट (सीसीए) के तहत कार्रवाई की। इसके जरिए पुलिस ने संगठित आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय अपराधियों पर कानूनी शिकंजा कसने का प्रयास किया है।

मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान में 710 गिरफ्तार

राज्य में मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार के खिलाफ भी पुलिस ने व्यापक अभियान चलाया। जनवरी से जून 2026 तक मादक पदार्थों से जुड़े 435 मामले दर्ज किए गए और 710 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान पुलिस ने बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद किए। इनमें 3,461 किलो गांजा, 151 किलो अफीम, 3.6 किलो ब्राउन शुगर और 10,218 किलो डोडा शामिल है। बरामद मादक पदार्थों की अनुमानित कीमत करीब 41 करोड़ रुपये बताई गई है।

पुलिस ने अवैध अफीम की खेती के खिलाफ भी अभियान चलाया। इसके तहत करीब 4,620 एकड़ क्षेत्र में लगी अफीम की फसल को नष्ट करने का दावा किया गया है।

सीईआईआर से 4,053 मोबाइल बरामद

चोरी या गुम हुए मोबाइल फोन की बरामदगी में भी पुलिस को सफलता मिली है। सीईआईआर पोर्टल के माध्यम से जनवरी से जुलाई 2026 तक 4,053 मोबाइल फोन बरामद किए गए और उन्हें उनके वास्तविक धारकों को सौंप दिया गया। पुलिस के अनुसार तकनीक आधारित इस व्यवस्था के माध्यम से चोरी या गुम हुए मोबाइल फोन को ट्रैक करने और उन्हें उनके वास्तविक मालिकों तक पहुंचाने में मदद मिल रही है।

14,083 विशेष प्रतिवेदित मामले दर्ज, 15,286 का निष्पादन

जनवरी से जुलाई की अवधि में राज्य में 14,083 विशेष प्रतिवेदित मामले दर्ज किए गए, जबकि 15,286 मामलों का निष्पादन किया गया। इसी दौरान पुलिस ने अलग-अलग कार्रवाई में 482 हथियार और 8,663 जिंदा कारतूस बरामद करने की जानकारी दी है।

पुलिस आधुनिकीकरण पर जोर

राज्य पुलिस ने अपराध नियंत्रण के साथ पुलिस बल को आधुनिक संसाधनों से लैस करने को भी प्राथमिकता दी है। पुलिस मुख्यालय के अनुसार 2025-26 में राज्य के 12 जिलों में ज्वाइंट पुलिस स्टेशन का निर्माण कराया जा रहा है। इसके अलावा पांच जिलों में सीआई और एसडीपीओ कार्यालय सह आवास का निर्माण कार्य जारी है। इन निर्माण परियोजनाओं का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों और जवानों के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना तथा पुलिसिंग को अधिक प्रभावी बनाना है।

636 चारपहिया और 849 दोपहिया वाहन मिले

पुलिस की गतिशीलता बढ़ाने के लिए वाहनों की उपलब्धता पर भी जोर दिया गया है। पुलिस मुख्यालय के अनुसार मार्च 2026 में झारखंड पुलिस को 636 चारपहिया और 849 दोपहिया वाहन उपलब्ध कराए गए। इसके अतिरिक्त 627 चारपहिया और 848 दोपहिया वाहनों की खरीद के आदेश भी जारी किए गए हैं। नए वाहनों से पुलिस की गश्ती, त्वरित कार्रवाई और दूरदराज के इलाकों में पहुंच को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

237 आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति

पुलिस कल्याण के क्षेत्र में भी कई कदम उठाए गए हैं। विभिन्न कल्याणकारी कोषों के माध्यम से पुलिसकर्मियों और उनके आश्रितों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई। पुलिस मुख्यालय के अनुसार 237 आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति दी गई। वहीं, पुलिस सेवा में उल्लेखनीय वीरता और साहस का प्रदर्शन करने वाले 37 वीरता पदक प्राप्त पुलिसकर्मियों को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिया गया।

अपराध नियंत्रण के साथ तकनीक आधारित पुलिसिंग पर जोर

झारखंड पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों से स्पष्ट है कि राज्य पुलिस ने नक्सलवाद और पारंपरिक अपराध के साथ-साथ साइबर अपराध, संगठित अपराध और मादक पदार्थों की तस्करी को भी प्राथमिकता में रखा है। एक ओर जहां नक्सल विरोधी अभियानों में गिरफ्तारियों, आत्मसमर्पण और हथियार बरामदगी पर जोर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर साइबर अपराध में बैंक खातों को फ्रीज कराने, रकम वापस दिलाने, मोबाइल नंबर और आईएमईआई ब्लॉक करने जैसी तकनीक आधारित कार्रवाई की गई है।

पुलिस मुख्यालय ने अपराध नियंत्रण और उग्रवाद विरोधी अभियान के साथ आधुनिक, तकनीक आधारित और जनोन्मुख पुलिसिंग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है। पुलिस के अनुसार आम लोगों की सुरक्षा, साइबर अपराध पर रोकथाम, संगठित अपराध पर कार्रवाई और मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण राज्य पुलिस की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे