निशा भगत की मौत की सीबीआई जांच कराई जाए : समीर उरांव

 




भाजपा ने पुलिस प्रशासन पर उठाए सवाल, आरोपितों की भूमिका की जांच और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग

रांची, 07 नवंबर (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अनुसूचित जनजाति (एसटी) मोर्चा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद समीर उरांव ने आदिवासी नेत्री निशा भगत की असामयिक मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए झारखंड सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मामले की सीबीआई जांच कराने और आरोपों में नामित लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

समीर उरांव ने शनिवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि निशा भगत निडर और संघर्षशील आदिवासी बेटी थीं। वह आदिवासी समाज के धर्म, संस्कृति, परंपरा, आस्था और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए लगातार आवाज उठा रही थीं। मौत से पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो जारी कर कुछ लोगों पर मानसिक एवं सामाजिक प्रताड़ना और चरित्र हनन के गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने पुलिस से सुरक्षा की मांग भी की थी, लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

उरांव ने कहा कि निशा भगत के वीडियो में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार, अजय तिर्की और झारखंड पुलिस सहित कुछ लोगों का नाम सामने आया है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक आदिवासी बेटी पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगा रही थी, तब प्रशासन ने उसकी शिकायतों को गंभीरता से क्यों नहीं लिया।

उन्होंने कहा कि झारखंड में इससे पहले भी सुभाष मुंडा, सोमा मुंडा, लक्ष्मीकांत मुंडा, रूपा तिर्की, संध्या टोपनो और प्रेम सागर मुंडा की मौत के मामले सामने आ चुके हैं। इन घटनाओं से राज्य में आदिवासी समाज के अगुआ और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

उरांव ने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार खुद को अबुआ सरकार कहती है, लेकिन आज आदिवासी समाज के लोगों को ही अपने अधिकार, सम्मान और सुरक्षा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। जल-जंगल-जमीन और आदिवासी अस्मिता की रक्षा के लिए आवाज उठाने वालों को सुरक्षा मिलनी चाहिए, न कि उन्हें प्रताड़ना का सामना करना पड़े।

उन्होंने भाजपा की ओर से मांग की कि निशा भगत की मौत की सीबीआई जांच कराई जाए। अजय तिर्की सहित आरोपों में नामित लोगों की भूमिका की जांच कर दोषी पाए जाने पर उनकी तत्काल गिरफ्तारी हो। निशा भगत की पुलिस से हुई बातचीत और सुरक्षा संबंधी शिकायतों की भी जांच की जाए तथा लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो। इसके अलावा आदिवासी समाज के अगुआ और पारंपरिक व्यवस्था से जुड़े लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा आदिवासी जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले दलालों और माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

समीर उरांव ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से निशा भगत को न्याय दिलाने और आदिवासी समाज की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार राज्य की जनता को सुरक्षा देने में असमर्थ है तो मुख्यमंत्री को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

प्रेस वार्ता में पूर्व विधायक शिवशंकर उरांव, प्रदेश प्रवक्ता अशोक बड़ाईक, एसटी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सन्नी टोप्पो, पूर्व विधायक रामकुमार पाहन और ओबीसी मोर्चा के प्रदेश मंत्री प्रकाश साहू उपस्थित थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे