स्वास्थ्य विभाग में घोटालों को लेकर बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर हमला, सीबीआई जांच की मांग

 


रांची, 26 मई (हि.स.)। झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग में कथित भ्रष्टाचार, दवा बर्बादी और एंबुलेंस खरीद घोटाले को लेकर हेमंत सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत गठित कॉरपोरेशन को “लूट, कमीशनखोरी और टेंडर मैनेजमेंट” का केंद्र बना दिया गया है। मरांडी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग की है।

मंगलवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा कि पिछले छह वर्षों में राज्य की स्थिति पूरी तरह बिगड़ चुकी है। उन्होंने कानून-व्यवस्था, विकास कार्यों में ठहराव और प्रशासनिक अव्यवस्था के लिए राज्य में फैले भ्रष्टाचार को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि प्रतिदिन राज्यभर से भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से जुड़ी शिकायतें उन्हें प्राप्त होती हैं, लेकिन सरकार भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के बजाय उसे संरक्षण देने का काम कर रही है।

मरांडी ने कहा कि वर्तमान सरकार “काम” करने की बजाय केवल “कमाने” में लगी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रेजरी घोटाले समेत कई मामलों में अब तक किसी बड़े अधिकारी पर कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना था कि जब तक दोषी अधिकारियों को पदों से हटाकर कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी, तब तक भ्रष्टाचार पर नियंत्रण संभव नहीं है।

नेता प्रतिपक्ष ने झारखंड मेडिकल एंड हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एंड प्रोक्योरमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (जेएमएचआईडीपीसीएल) में कथित अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यहां नियमों की अनदेखी करते हुए सेवानिवृत्त अधिकारी शैलेंद्र श्रीवास्तव को कंसलटेंट नियुक्त किया गया, जबकि राज्य सरकार के नियम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि किसी सेवानिवृत्त अधिकारी को अधिकतम तीन वर्षों तक ही सेवा विस्तार दिया जा सकता है और उसके बाद मुख्यमंत्री की अनुमति आवश्यक होती है। बावजूद इसके बिना मुख्यमंत्री की स्वीकृति के ही उन्हें चौथे वर्ष के लिए नियुक्त कर दिया गया और वे अब पांचवें वर्ष में भी पद पर बने हुए हैं।

मरांडी ने स्वास्थ्य विभाग के ऑडिट में सामने आई कथित गड़बड़ियों का जिक्र करते हुए कहा कि जून 2022 में 55.58 करोड़ रुपये की लागत से खरीदी गई 206 एंबुलेंसों का कोई उपयोगिता मूल्यांकन नहीं किया गया। ये एंबुलेंस एक वर्ष से अधिक समय तक नामकुम में निष्क्रिय अवस्था में खड़ी रहीं और जनता को इनका कोई लाभ नहीं मिला। इसके बावजूद अब 237 नई कस्टमाइज्ड एंबुलेंसों की खरीद के लिए लगभग 80 करोड़ रुपये का नया टेंडर जारी कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में एंबुलेंस खरीद, तकनीकी मूल्यांकन, उपयोग और संपत्ति प्रबंधन में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है।

मरांडी ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग के गोदामों में करोड़ों रुपये की जीवनरक्षक दवाएं एक्सपायर हो गईं। दवाएं खरीदी गईं, लेकिन जरूरतमंद मरीजों तक पहुंच ही नहीं सकीं।

कोविड काल के दौरान ऑक्सीजन टैंक परियोजना में भी करीब 24 करोड़ रुपये की अनियमितता का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि अनुभवहीन कंपनी को ठेका दे दिया गया। चयनित कंपनी निर्धारित 10 वर्षों के अनुभव की शर्त पूरी नहीं करती थी और उसके पास आवश्यक सुरक्षा प्रमाणपत्र भी नहीं थे, इसके बावजूद उसे तकनीकी रूप से योग्य घोषित कर करोड़ों रुपये का ठेका सौंप दिया गया।

मरांडी ने एंबुलेंस निर्माण से जुड़े एक अन्य मामले का भी उल्लेख करते हुए कहा कि संबंधित कंपनी निर्धारित वार्षिक टर्नओवर की शर्त पूरी नहीं करती थी और उसके पास एंबुलेंस निर्माण का प्रमाणन भी नहीं था, फिर भी उसे पात्र घोषित कर दिया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पूरे मामले को दबाने का प्रयास कर रही है।

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि नामकुम स्थित ऑडिट स्थल को “छावनी” में तब्दील कर दिया गया, ताकि किसी भी प्रकार की जानकारी बाहर न आ सके। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सरकार किस बात से डर रही है और क्या छिपाने की कोशिश की जा रही है।

नेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि जेएमएचआईडीपीसीएल का दोबारा स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए और पूरी ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। उन्होंने कहा कि कैग रिपोर्ट में उजागर अनियमितताओं के आधार पर तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच सीबीआई से कराने की मांग दोहराई।----------

हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे