(संशाेधित) झारखंड में वित्तीय कुप्रबंधन चरम पर, बजट का 15 प्रतिशत खर्च नहीं: भाजपा
रांची, 07 अप्रैल (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने झारखंड की वित्तीय स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए राज्य सरकार पर कुप्रबंधन का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि राज्य में वित्तीय अव्यवस्था अब चरम सीमा पर पहुंच चुकी है।
मंगलवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में शाहदेव ने कहा कि ताज़ा बजट आंकड़े यह दर्शाते हैं कि सरकार एक ओर संसाधनों की कमी की बात करती है, जबकि दूसरी ओर उपलब्ध धन का समुचित उपयोग करने में विफल रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 के लगभग 1.45 लाख करोड़ रुपये के बजट के मुकाबले सरकार केवल 1.23 लाख करोड़ रुपये ही खर्च कर सकी, जिससे राजकोष पर अनावश्यक दबाव बढ़ा है।
शाहदेव के अनुसार, सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि बजट का करीब 15 प्रतिशत हिस्सा खर्च ही नहीं हो पाया। उन्होंने इसे झारखंड की जनता के साथ “क्रूर मजाक” करार दिया। उनका कहना है कि कई जनकल्याणकारी विभागों-जैसे स्कूली शिक्षा, पंचायती राज, नगर विकास, कृषि और स्वास्थ्य में खर्च 50 से 70 प्रतिशत के बीच ही सीमित रह गया, जो विकास कार्यों में बाधा और आम लोगों के अधिकारों की अनदेखी को दर्शाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की लापरवाही का खामियाजा आम जनता, कर्मचारी और पेंशनभोगी उठा रहे हैं। पेंशन भुगतान में देरी और कर्मचारियों के वेतन में बाधा को उन्होंने सरकार की गलत प्राथमिकताओं का परिणाम बताया।
शाहदेव ने कहा कि सरकार केंद्र से मिलने वाले संसाधनों का सही उपयोग नहीं कर पा रही है और बाद में वित्तीय संकट का हवाला देती है। उन्होंने इसे सरकार का “दोहरा चरित्र” बताते हुए कहा कि यदि योजनाओं का समय पर क्रियान्वयन होता और बजट का सही उपयोग किया जाता, तो राज्य की आर्थिक स्थिति इतनी खराब नहीं होती।
उन्होंने अंत में कहा कि मौजूदा सरकार के पास न स्पष्ट दृष्टि है और न ही प्रभावी कार्य करने की इच्छाशक्ति, जिसका सीधा असर राज्य के विकास पर पड़ रहा है।------------
हिन्दुस्थान समाचार